सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। समुद्र की गहराइयों में रहने वाली विशालकाय व्हेल को लेकर इंसानों के मन में हमेशा जिज्ञासा रही है। लेकिन क्या होगा, अगर कोई इंसान गलती से व्हेल के पेट में पहुंच जाए? क्या वह वहां जिंदा रह सकता है और बाहर निकलने का रास्ता खोज सकता है? हॉलीवुड की सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म Whalefall इसी सवाल को रोमांचक अंदाज में पेश करती है। फिल्म में एक युवा गोताखोर स्पर्म व्हेल के पेट में फंस जाता है और सीमित ऑक्सीजन के बीच अपनी जान बचाने की कोशिश करता है। यह फिल्म डैनियल क्रॉस के वर्ष 2023 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। हालांकि, फिल्म की कहानी और वास्तविक विज्ञान में बड़ा अंतर है। वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी इंसान का स्पर्म व्हेल के पेट में पहुंचना बेहद असामान्य घटना होगी। यदि ऐसा हो भी जाए, तो वहां मौजूद परिस्थितियों में जीवित बचना अत्यंत कठिन होगा।
क्या व्हेल इंसान को पूरा निगल सकती है? स्पर्म व्हेल दांतों वाली विशाल समुद्री स्तनधारी है। यह मुख्य रूप से स्क्विड और दूसरे समुद्री जीवों का शिकार करती है। यह भोजन की तलाश में समुद्र की काफी गहराई तक जाती है। इसका गला इतना बड़ा हो सकता है कि किसी बहुत बड़े स्पर्म व्हेल के मामले में इंसान का उसमें से गुजरना शारीरिक रूप से संभव हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि व्हेल इंसानों को अपना शिकार बनाती है। समुद्री जीव विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पर्म व्हेल आमतौर पर अपने पसंदीदा शिकार को पकड़ती है और इंसान उसके प्राकृतिक भोजन का हिस्सा नहीं है। अब तक किसी स्पर्म व्हेल द्वारा इंसान को पूरा निगलने की विश्वसनीय रूप से प्रमाणित घटना सामने नहीं आई है। फिल्म में दिखाई गई स्थिति इसलिए काल्पनिक रोमांच के अधिक करीब है। व्हेल के पेट में पहुंचने पर क्या होगा? स्पर्म व्हेल का पाचन तंत्र कई हिस्सों में बंटा होता है। इसके पेट के अलग-अलग हिस्से भोजन को मसलने, तोड़ने और पचाने का काम करते हैं। पेट की मांसपेशियों का दबाव किसी इंसान को गंभीर चोट पहुंचा सकता है। इसके बाद पाचक अम्ल और अन्य रासायनिक प्रक्रियाएं शरीर के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा करेंगी।
तुलनात्मक शरीर रचना विशेषज्ञ जॉय राइडेनबर्ग के अनुसार, यदि किसी गोताखोर ने शरीर को तरल पदार्थों से बचाने वाला विशेष सूखा डाइविंग सूट पहना हो, तो कुछ हिस्सों को पेट के अम्ल से सीमित सुरक्षा मिल सकती है। लेकिन शरीर के खुले हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। सूट और उपकरण होने के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित रहना संभव नहीं होगा। क्या ऑक्सीजन टैंक बचा सकता है जान? फिल्म में गोताखोर के पास सीमित समय तक सांस लेने के लिए स्कूबा उपकरण होता है। लेकिन ऑक्सीजन टैंक केवल सांस लेने में मदद करता है; वह पेट की मांसपेशियों, पाचक अम्ल, चोट या दूसरे शारीरिक खतरों से सुरक्षा नहीं देता। इसके अलावा, गोताखोर को अपना मास्क और सांस लेने का उपकरण सुरक्षित रखना होगा। यदि उपकरण क्षतिग्रस्त हो जाए या सांस लेने की व्यवस्था बाधित हो जाए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए केवल ऑक्सीजन टैंक होने से किसी व्यक्ति के जीवित बचने की गारंटी नहीं मिलती।
समुद्र की गहराई में बढ़ जाता है खतरा स्पर्म व्हेल समुद्र में बहुत गहराई तक गोता लगा सकती है। ऐसे वातावरण में पानी का दबाव सतह की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इंसानी शरीर और सामान्य स्कूबा उपकरण इस तरह की गहराइयों में बिना विशेष सुरक्षा के लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकते। यदि व्हेल गोता लगाते हुए बहुत नीचे चली जाए, तो गोताखोर को दबाव से संबंधित गंभीर चोटों और उपकरणों की विफलता का खतरा होगा। समुद्री जीव विशेषज्ञ शेन गेरो ने भी इस तरह की स्थिति में जीवित बचने की संभावना को बेहद कम बताया है।
‘व्हेलफॉल’ का असली वैज्ञानिक अर्थ क्या है? दिलचस्प बात यह है कि Whalefall केवल फिल्म का नाम नहीं, बल्कि समुद्री विज्ञान का एक वास्तविक शब्द भी है। जब किसी व्हेल की मृत्यु के बाद उसका शव समुद्र की गहराई में समुद्र तल तक पहुंच जाता है, तो इस घटना को ‘व्हेल फॉल’ कहा जाता है।
व्हेल का विशाल शरीर गहरे समुद्र में रहने वाले जीवों के लिए भोजन और पोषक तत्वों का स्रोत बन जाता है। छोटे जीव, समुद्री कीड़े, क्रस्टेशियन और दूसरे जीव उसके अवशेषों से पोषण प्राप्त करते हैं। इस तरह एक मृत व्हेल समुद्र की गहराइयों में लंबे समय तक एक छोटे पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा दे सकती है। फिल्म और विज्ञान में कितना अंतर है?
Whalefall दर्शकों को एक असाधारण परिस्थिति में फंसे व्यक्ति के संघर्ष की कहानी दिखाती है। फिल्म में व्हेल की शारीरिक संरचना और पाचन तंत्र से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्यों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन किसी इंसान का व्हेल के पेट में पहुंचकर लंबे समय तक जीवित रहना वास्तविक जीवन में बेहद अविश्वसनीय परिदृश्य है। वैज्ञानिकों की राय में, ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए सांस लेना, चोटों से बचना और बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा। इसलिए फिल्म को वास्तविक घटना या व्यावहारिक जीवन रक्षा के मार्गदर्शन के बजाय विज्ञान से प्रेरित काल्पनिक रोमांच के रूप में देखना अधिक उचित है। निष्कर्ष: व्हेल के पेट में फंसने पर इंसान के बचने की संभावना अत्यंत कम होगी। ऑक्सीजन टैंक या विशेष सूट कुछ सीमित सुरक्षा दे सकते हैं, लेकिन पाचन तंत्र, शारीरिक दबाव और समुद्र की गहराई से जुड़े खतरों से पूरी तरह बचा नहीं सकते।
Hashtags: #ScienceTechnology #Bhopal #एनएन #टवर #आईट #गहर #रहन #अगर #गलत #व्हेलकेपेटमें