सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : NASA के आर्टेमिस II अंतरिक्ष यात्रियों ने अप्रैल 2026 में चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से के पास उड़ान के दौरान उसकी अंधेरी सतह पर रोशनी की क्षणिक चमकें देखीं। NASA ने अब पुष्टि की है कि ये चमकें चट्टानी टुकड़ों के तेज रफ्तार से चंद्र सतह से टकराने के कारण पैदा हुई थीं।

अंतरिक्ष यात्रियों ने Orion spacecraft से पांच बेहद हल्की, सुई की नोक जैसी रोशनी फूटने की सूचना दी। उस समय अंतरिक्षयान चंद्रमा से करीब 46,000 मील दूर था। वैज्ञानिकों ने शुरुआत में cosmic rays और spacecraft से परावर्तन जैसी अन्य संभावनाओं पर भी विचार किया, लेकिन बाद में पुष्टि की कि ये वास्तविक lunar impact flashes थे।

पृथ्वी के विपरीत, चंद्रमा के पास ऐसा वातावरण नहीं है जो अंतरिक्ष से आने वाले मलबे को जला दे या उसकी रफ्तार कम कर दे। इसलिए meteoroids सीधे चंद्र सतह से टकरा सकते हैं। इन टक्करों से बहुत कम समय तक रहने वाली रोशनी पैदा होती है, जिन्हें impact flashes कहा जाता है। इन्हें spacecraft से या पृथ्वी से telescopes की मदद से देखा जा सकता है।

आर्टेमिस II के ये अवलोकन एक तय lunar science programme का हिस्सा थे। अंतरिक्ष यात्रियों से खास तौर पर ऐसी चमकें देखने को कहा गया था, क्योंकि ऐसे impacts को ट्रैक करने से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि चंद्रमा पर कितनी बार टक्कर होती है और उसकी सतह से टकराने वाली वस्तुओं का आकार और गति क्या होती है।

NASA का अनुमान है कि जिन वस्तुओं से ये चमकें पैदा हुईं, उनका आकार कुछ इंच से ज्यादा नहीं था। छोटे आकार के बावजूद वे हजारों मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं और इतनी ऊर्जा तथा रोशनी पैदा कर रही थीं कि अंधेरे चंद्र परिदृश्य के सामने दिखाई दे सकें।

इन अवलोकनों का असर भविष्य के चंद्र अन्वेषण पर भी पड़ सकता है। चंद्रमा के meteoroid impact environment की बेहतर जानकारी वैज्ञानिकों को भविष्य के मिशनों, जिनमें NASA का Artemis programme भी शामिल है, के लिए प्रस्तावित अंतरिक्ष यात्रियों, habitats और उपकरणों पर संभावित जोखिमों का आकलन करने में मदद करेगी।


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