सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के समाज कल्याण एवं अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है। इसका प्रभाव छात्रवृत्ति योजनाओं, मौजूदा योजनाओं में संशोधन और छात्रावासों को पूरी तरह संचालित करने की तैयारियों पर भी पड़ा है। विभाग ने इस समस्या को दूर करने के लिए संबंधित सेवा विभाग से रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार, विभाग ने जुलाई में सेवा विभाग को पत्र लिखकर कर्मचारियों की कमी से पैदा हो रही प्रशासनिक समस्याओं की जानकारी दी थी। पत्र में कहा गया कि पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने और छात्रावासों को सुचारु रूप से चलाने में कठिनाई हो रही है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, विभाग में छह श्रेणियों के कुल 25 स्वीकृत पदों में से 13 पद खाली हैं, जबकि केवल 12 पदों पर कर्मचारी तैनात हैं। कनिष्ठ सहायकों के 13 स्वीकृत पदों में से सात खाली हैं। इसके अलावा सहायक अनुभाग अधिकारियों और अन्य प्रशासनिक पदों पर भी रिक्तियां बनी हुई हैं।
कर्मचारियों की कमी का असर फाइलों के निपटारे पर भी पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जिन प्रस्तावों को सामान्य परिस्थितियों में लगभग एक महीने में पूरा किया जा सकता है, उन्हें निपटाने में अब करीब तीन महीने लग रहे हैं। इससे योजनाओं से जुड़े निर्णय और प्रशासनिक प्रक्रियाएं धीमी हो गई हैं। विभाग के सामने नेहरू बाल छात्रावास और कमला नेहरू बालिका छात्रावास को पूरी तरह संचालित करने की चुनौती भी है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों छात्रावासों को चालू वर्ष में पूरी तरह कार्यशील बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए रिक्त पदों को समय पर भरना जरूरी है।
इस स्थिति से अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों सहित कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को परेशानी हो सकती है। अब विभाग की प्राथमिकता रिक्त पदों को भरकर लंबित कार्यों में तेजी लाने और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचाने की है।
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