सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान 22 वर्षीय मोनिश की मौत के मामले में पांच दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी सात साल की जेल की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने 27 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग और बृजपुरी इलाके में हिंसा के दौरान मोनिश पर भीड़ ने हमला किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मोनिश का पीछा कर उसे घेरा गया और हमला किया गया। बाद में उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोटों के कारण मौत होने की बात सामने आई थी।

इस मामले में अमन कश्यप, देवेंद्र कुमार, प्रदीप राय, आशीष उर्फ गोली और अरुण कुमार ने अपनी दोषसिद्धि को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपियों ने गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभास, पुलिस गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी और पहचान परेड नहीं कराए जाने जैसे मुद्दे उठाए थे।

हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों की भूमिका को केवल भीड़ में मौजूद रहने तक सीमित नहीं दिखाते। पुलिसकर्मियों की गवाही के अनुसार, वे हथियारबंद भीड़ में आगे थे और मोनिश पर हमला करने के लिए दूसरों को उकसा रहे थे। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पांचों की अपीलें खारिज कर दीं।

निचली अदालत ने नवंबर 2024 में पांचों को दोषी ठहराया था और जनवरी 2025 में सात साल की कठोर कैद तथा 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।


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