नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस में हाल ही में हुआ विरोध प्रदर्शन अचानक सामने आया घटनाक्रम नहीं था। इसकी शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में पार्किंग विवाद के बाद पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प से हुई। इसके बाद अधिकारियों की बैठक, दो पुलिस अधिकारियों के तबादले और पुलिसकर्मियों में बढ़ते असंतोष ने मामले को तूल दे दिया। आखिरकार 2 नवंबर को पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर जवानों ने प्रदर्शन किया और अपने अधिकारियों के तबादले वापस लेने की मांग उठाई।
23 अक्टूबर: शाहदरा थाने में विवाद
शाहदरा इलाके में पार्किंग विवाद के बाद हुए घटनाक्रम में अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई। इस मामले को लेकर कई वकील शाहदरा थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वकीलों का आरोप था कि पुलिस ने पहले गिरफ्तारी का भरोसा दिया, लेकिन बाद में आरोपियों को छोड़ दिया गया। इसी दौरान एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर वकीलों को धमकाने और सर्विस रिवॉल्वर दिखाने का आरोप भी लगा। पुलिस पक्ष से इन आरोपों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।
28 अक्टूबर: अधिकारियों के तबादले और हड़ताल समाप्त
विवाद बढ़ने के बाद जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन कामबंदी शुरू कर दी। 28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और बार काउंसिल तथा जिला बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इसके बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर उपमंडल से विशेष पुलिस इकाई महिला एवं बच्चों (SPUWAC) में भेज दिया गया, जबकि शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला सिक्योरिटी ब्रांच में कर दिया गया। तबादला आदेश जारी होने के बाद वकीलों ने हड़ताल वापस ले ली।
30 अक्टूबर: समन्वय बैठक
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और जिला बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक की। इसमें पुलिस और वकीलों के बीच विवादों के समाधान के लिए संयुक्त समन्वय और शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी।
2 नवंबर: पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
दोनों अधिकारियों के तबादलों से पुलिस विभाग के एक वर्ग में नाराजगी बढ़ गई। करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी, जिनमें महिला जवान भी शामिल थीं, PHQ के गेट नंबर-1 के बाहर जुटे। उन्होंने दोनों अधिकारियों को पुरानी तैनाती पर वापस भेजने और पुलिस आयुक्त के साथ संपर्क सभा आयोजित करने की मांग की। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने प्रदर्शनकारियों को अनुशासन बनाए रखने और मुख्यालय के भीतर अपनी बात रखने की सलाह दी।
3 नवंबर: एसीपी के निलंबन की खबर
प्रदर्शन के अगले दिन एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रदर्शन में उनकी भूमिका को लेकर की गई। इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर असंतोष और पुलिस-वकील संबंधों से जुड़े विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।
पूरे घटनाक्रम में पुलिसकर्मियों की मांगों, वकीलों की शिकायतों और विभागीय कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और पुलिस-वकील समन्वय व्यवस्था की आगे की दिशा पर नजर रहेगी।
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