सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा यानी JSSC-CGL को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर चयनित अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की है। सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण सही और गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को अलग करना मुश्किल है। इसी आधार पर सरकार ने पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करना जनहित में उचित बताया है। सरकार के अनुसार, चयन से पहले अभ्यर्थियों को यह भी बताया गया था कि नियुक्तियां CID जांच के अधीन रहेंगी।

दूसरी ओर, चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों और जांच के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। उनका सवाल है कि यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद परीक्षा तथा नियुक्तियां आगे बढ़ाई गईं, तो अब पूरी प्रक्रिया को रद्द करने का आधार क्या है। करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर इस फैसले का असर पड़ने की बात सामने आई है। मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को मिली अंतरिम राहत जारी रखी है। फिलहाल राहत पाने वाले चयनित अभ्यर्थी अपने पदों पर काम करते रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित है। अब अदालत में सरकार के तर्क, चयनित अभ्यर्थियों की आपत्तियों और जांच की स्थिति पर आगे सुनवाई होगी।


Hashtags: #Education #Bhopal #Desksource #Jssc #Cgl #सरक #DeskSource #एनएन #टवर #आईट