सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: जयपुर की मोना अग्रवाल ने पेरिस पैरालिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता है, लेकिन मेडल तक पहुंचने का मोना का सफर आसान नहीं था। बचपन में पोलियो हो गया। इससे चलने में परेशानी होने लगी। समाज के ताने सुनने पड़े। अलग-अलग खेल सीखे। उनमें नेशनल लेवल तक पहुंची। 2 साल पहले शूटिंग सीखनी शुरू की। 10 महीने बच्चों से अलग रही। अब देश के लिए मेडल जीतकर सफलता हासिल की।
2022 से शुरू की शूटिंग की तैयारी
रविंद्र चौधरी ने बताया- साल 2021 दिसंबर से मोना ने शूटिंग में करियर बनाने की ठानी। जनवरी 2022 से उन्होंने शूटिंग की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने शूटिंग में जी-जान लगा दी। उसी बदौलत आज वह इस मुकाम तक महज 2 साल में ही पहुंच पाई हैं। रविंद्र चौधरी ने भी सिटिंग वॉलीबॉल खेला है। फिलहाल व्हीलचेयर बास्केटबॉल का प्लेयर हूं। हम दोनों मिले, एक दूसरे से बातचीत की।
परिवार की रजामंदी से लव मैरिज हुई अरेंज
मेरी और मोना की मुलाकात साल 2017 में जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में एक टूर्नामेंट के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे दोनों की बातचीत बढ़ने लगी। फिर दोस्ती हो गई। फिर लगा कि हम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं, लेकिन हम दोनों अलग-अलग जातियों से आते हैं। हम लव मैरिज करना चाहते थे। परिवार की रजामंदी के बाद शादी बहुत ही धूमधाम से हुई। – रविंद्र चौधरी, मोना के पति
10 महीनों से बच्चों से नहीं मिली मोना
रविंद्र चौधरी ने कहा- मैंने, मेरे मम्मी-पापा, मेरे भाई और भाभी ने मिलकर दोनों बच्चों को संभाला। मोना को इस बात का विश्वास दिलाया कि उनके बच्चों की अच्छी परवरिश हो रही है। मुझे और मोना दोनों को ऐसा लगता है कि सामान्य लोग जो नहीं कर पाते हैं, उससे ज्यादा हमें अपने समाज के लिए करना है। इसी सोच के साथ मैं और मोना दोनों मेहनत कर रहे हैं।
मोना को बच्चों के साथ खेलना बहुत ज्यादा पसंद है। हमारे भी दो बच्चे हैं, लेकिन अपने गेम की वजह से वह बच्चों से ही पिछले 8 से 10 महीनों से नहीं मिल पाई। लगातार दिल्ली रहकर तैयारी कर रही थी। इसी बात का उन्हें सबसे ज्यादा दुख भी रहता है। – रविंद्र चौधरी
रविंद्र ने बताया- शूटिंग काफी महंगा खेल है। आज मेडल जीतने के बाद तो मोना को काफी लोग पहचानने लग गए हैं। कुछ वक्त पहले तक उसे न लोग जानते थे, सरकारी मदद भी पिछले कुछ महीनों से मिल रही थी। शूटिंग बहुत ज्यादा महंगा गेम है। ऐसे में परिवार के लोग मिलकर मोना को इस खेल में आगे बढ़ाने के लिए मदद कर रहे थे।