सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) से अस्पतालों में सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा उपभोग्य सामग्री और मेडिकल डिवाइस की कीमतों के तौर-तरीकों की समीक्षा करने की सिफारिश की है। राज्य के एक सर्वे में खरीद मूल्य और छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
यह सर्वे जुलाई में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में किया गया था। FDA के निष्कर्षों के अनुसार, ₹11.05 में खरीदे गए इंट्रावीनस इन्फ्यूजन सेट पर ₹325 का MRP छपा था। इसी तरह ₹6.75 में खरीदी गई सिरिंज का MRP ₹57.20 पाया गया, जबकि ₹29.41 में खरीदे गए कैथेटर पर ₹310 का MRP दर्ज था।
मुंढे ने कहा कि FDA ने अपने निष्कर्ष NPPA को सौंप दिए हैं और व्यापारिक खरीद मूल्य तथा घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की सिफारिश की है। प्रस्ताव में बार-बार इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा उपभोग्य सामग्री को उपयुक्त मूल्य-नियंत्रण ढांचे के तहत लाने पर विचार करने की भी बात कही गई है।
FDA ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों की बिलिंग या चिकित्सा प्रक्रियाओं के शुल्क उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इस मामले में उसकी भूमिका कीमतों की इन विसंगतियों को NPPA के संज्ञान में लाने तक थी, क्योंकि संबंधित ढांचे के तहत कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार NPPA के पास है।
इसके बाद केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर NPPA से रिपोर्ट मांगी है। आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेने से पहले फार्मास्यूटिकल्स विभाग प्राधिकरण के विश्लेषण की जांच कर सकता है।
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