सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : महाराष्ट्र की राजनीति में मनसे प्रमुख राज ठाकरे की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा छेड़ दी है। राज ठाकरे ने लिखा, “कौए के श्राप से गाय नहीं मरती। फिलहाल इतना ही…” इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगा कि आखिर उनका इशारा किसकी ओर है। हालांकि, राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में किसी नेता या संगठन का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया है।
राज ठाकरे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब हिंदी भाषा और महाराष्ट्र की बहुभाषी पहचान को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। हिंदी दिवस के अवसर पर नवी मुंबई में आयोजित छठे अखिल राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र को बहुभाषी राज्य बताते हुए मराठी के साथ हिंदी, कोंकणी, गुजराती, सिंधी, कन्नड़ और वारली जैसी भाषाओं के सम्मान की बात कही थी।
इसके बाद राज ठाकरे की संकेतात्मक पोस्ट को कुछ राजनीतिक विश्लेषक हिंदी-मराठी भाषा विवाद से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पोस्ट सीधे अमित शाह के बयान के जवाब में की गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कार्यक्रम में मातृभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं के सम्मान की बात कही। ऐसे में राज ठाकरे की पोस्ट ने महाराष्ट्र में भाषा और पहचान की राजनीति को लेकर चर्चा फिर तेज कर दी है।
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