बढ़ती महंगाई के बाद भी आखिर क्यूँ नहीं बढ़ी श्रमिकों की मज़दूरी आखिर कब मिलेगी देश को बनाने वाले मज़दूरों को सही मज़दूरी? मज़दूर हैं क्या इसलिए मज़बूर हैं?

अनुराग पांडेय
आईटीडीसी न्यूज़ एमपी —
मज़दूरों व श्रमिकों के योगदान को सराहने के लिए मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, हर साल एक मई को दुनिया के कई देशो मे मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) कोरोना काल मे मज़दूरों को हुई परेशानियों के बाद पहली बार मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस जिसको कामगार दिन और कामगार दिवस के रूप मे भी जाना जाता है। अमेरिका से हुई थी इंटरनेशनल लेबर डे (अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस) की शुरुआत कराता है ऐतिहासिक श्रम आंदोलन का स्मरण।

 

इंट्रीग्रेटेड न्यूज़ सेंटर रिपोर्ट : अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस या मई दिन हर साल 1 मई को मनाया जाता है इस दिन उत्सव के रूप मे जगह जगह मज़दूर संघ द्वारा सड़क प्रदर्शन आयोजित किया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। कुछ समय के बाद अमेरिका में 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया था। मौजूदा समय मे भारत और अन्य देशों में मज़दूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित क़ानून लागू है। भारत मे आज भी मज़दूरों को काम करते समय इतनी सुविधा व सुरक्षा नहीं है इसीलिए बाकी दुनिया की तुलना मे भारत मे मजदूरों की असमय मृत्यु दर बहुत ही अधिक है परंतु पिछले कुछ वर्षो मे इसमे बढ़ती जागरूकता की वजह से अकड़ों मे कुछ हद तक गिरावट आयी है ।

भारत मे आज भी अनेकों राज्यो मे अभी भी मज़दूरों को 12 से 15 घंटे लगातार काम करवाया जाता है और प्रति दिन के हिसाब से कम पैसे दिये जाते है ऐसा नहीं है की भारत मे ऐसे अपराध के लिए कोई ठोस कानून नहीं है परंतु वजह है भारतीय मज़दूरों का कम पढ़े लिखे होना है और देश मे अधिक बेरोजगारी। भारतीय कानून मे Contract Labour Act,1970 और Minimum Wages Act,1948 और अन्य बहुत से कानून है जो अलग अलग तरह के श्रमिक कर्मचारियों के लिए बनाएं गये है जो हर तरह के अपराधों पे लगाम लगाने के लिए बनाया गये है परंतु फिर भी लगातार मजदूरों का शोषण किया जाता रहा है ।
जीवनयापन के लिए मज़दूरी करते कुछ श्रमिक। फोटो- इक्नोमिक्स टाइम्स

अब समय है की भारतीय मज़दूरों को भी एक सुरक्षित और अच्छा वातावरण दिया जाये वैसे पिछले कुछ वर्षो मे सरकार भी इस विषय के ऊपर काम करती नज़र आयी है और बहुत से नए कानून भी लेकर आयी है । मजदूरों का देश के विकास मे अतुलनीय योगदान है और वही है जो देश को बना रहें है । भारत मे पुरुष व महिला श्रमिक ही नहीं परंतु बच्चे भी श्रमिक है जो की बहुत सालों से एक समस्या रही है परंतु पिछले कुछ सालों मे इसमे कमी आयी है और इसकी प्रमुख वजह रही है मध्य प्रदेश सरकार के “स्कूल चले हम” जैसे अभियान अब भारत सरकार ने भी बहुत से नए कानून लाये है जिसमे बच्चों से मज़दूरी करना एक अपराध है । अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस हमे याद दिलाता है की हमे उनको भी याद करना चाहिए जो आधे पेट खाकर भी अपना काम पूरी मेहनत से करते है।