सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेन बफे के बेटे हॉवर्ड बफे की जिंदगी उनके पिता से काफी अलग रही। जहां वॉरेन बफे शेयर बाजार और निवेश की दुनिया के लिए जाने गए, वहीं हॉवर्ड को बचपन से ही खेती, मशीनों और जमीन के काम में दिलचस्पी थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 5 साल की उम्र में उन्होंने परिवार के ओमाहा स्थित घर के पीछे के हिस्से को ही मक्के के खेत में बदल दिया था।

हॉवर्ड के पिता ने उन्हें अपनी संपत्ति का वारिस बनकर आराम से जीवन बिताने के बजाय अपना रास्ता चुनने दिया। हॉवर्ड ने कई कॉलेजों में पढ़ाई शुरू की, लेकिन किसी से स्नातक की डिग्री पूरी नहीं की। वॉरेन बफे का मानना था कि उनके बच्चों को उनकी सफलता की नकल करने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें वही काम करना चाहिए जिसे वे पसंद करते हैं।

हॉवर्ड ने आखिरकार खेती को अपना पेशा बनाया। वॉरेन बफे ने उनके लिए जमीन खरीदी, लेकिन उसे मुफ्त में देने के बजाय उनसे किराया लिया। दिलचस्प बात यह थी कि किराए की राशि हॉवर्ड के वजन से भी जोड़ी गई थी। वॉरेन का कहना था कि वह अपने बच्चों को सिर्फ उपनाम की वजह से संपत्ति पाने का आदी नहीं बनाना चाहते थे। बड़े होने के बाद हॉवर्ड ने खेती के साथ सामाजिक कार्य और फोटोग्राफी में भी पहचान बनाई। वह दुनिया के कई देशों में गरीबी, खाद्य सुरक्षा और खेती से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे। आज उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि बेहद संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपने पिता के निवेश क्षेत्र के बजाय कृषि और सामाजिक कार्य को अपना रास्ता बनाया।


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