सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि SIR को लेकर मतदाताओं में डर की भावना पैदा होना लोकतंत्र के लिए अच्छी स्थिति नहीं है।
ओपी रावत ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग में उनके कार्यकाल के दौरान फैसले आमतौर पर सर्वसम्मति से लिए जाते थे। मतभेद होने की स्थिति में भी संस्थागत एकता बनाए रखने के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाता था। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद को लेकर जनता के भरोसे पर असर पड़ने की चिंता है।
रावत ने SIR को लेकर अपनी टिप्पणी में कहा कि इस प्रक्रिया ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जिसमें कई मतदाता खुद को चिंतित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों को लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सार्वजनिक होने की स्थिति लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। रावत ने यह भी कहा कि यदि किसी चुनाव आयुक्त को किसी निर्णय या प्रक्रिया पर आपत्ति हो तो वह अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख सकता है।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच जारी बहस के बीच ओपी रावत की टिप्पणी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत विश्वास के मुद्दे को फिर चर्चा में ले आई है।
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