दिल्ली की 675 झुग्गी बस्तियों का होगा पुनर्विकास, 4 लाख परिवारों को मिलेंगे पक्के घर
नई दिल्ली: दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए आवास की नई योजना लागू हो गई है। दिल्ली सरकार ने 675 झुग्गी-झोपड़ी (JJ) बस्तियों के पुनर्विकास और पुनर्वास के लिए नई नीति अधिसूचित कर दी है। इसके तहत करीब 4 लाख परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। नीति का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को बेहतर आवास, बुनियादी सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
नई नीति के तहत पात्र परिवारों को कम से कम 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल का आवास दिया जाएगा। इसमें पानी, बिजली, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रावधान होगा। सरकार की प्राथमिकता परिवारों को उनकी मौजूदा बस्ती या उसके आसपास ही बसाने की है, ताकि रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और आजीविका प्रभावित न हो। जरूरत के अनुसार कुछ बस्तियों का दूसरे स्थानों पर पुनर्वास भी किया जा सकेगा।
नीति के अनुसार, पात्रता के लिए संबंधित झुग्गी का 1 जनवरी 2025 से पहले अस्तित्व में होना जरूरी है। लाभार्थी भारतीय नागरिक और कम से कम 18 वर्ष का होना चाहिए। परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। निर्धारित सर्वेक्षण और वैध दस्तावेजों के आधार पर पात्रता की जांच की जाएगी। प्रत्येक पात्र परिवार को एक आवास मिलेगा। मकान की निर्धारित लागत 1.50 लाख रुपये रखी गई है, जबकि रखरखाव के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान है।
योजना को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के माध्यम से लागू किया जाएगा। इसमें सरकारी संसाधनों के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का भी इस्तेमाल होगा।
पहले चरण में सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की 17 बस्तियों में करीब 4,870 झुग्गियों के पुनर्विकास की तैयारी है। इनके लिए तीन बहुमंजिला आवासीय कॉलोनियां विकसित करने की योजना बनाई गई है। सरकार के सामने अब पात्र परिवारों की पहचान, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और समय पर मकान उपलब्ध कराने की चुनौती होगी।
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