नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। 2 नवंबर को कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, अक्षरधाम और आईटीओ में AQI 349 तक पहुंच गया, जबकि इंडिया गेट और जनपथ के आसपास यह 335 दर्ज किया गया। रोहिणी में प्रदूषण का स्तर 396 तक पहुंचने से स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार और यातायात पुलिस ने वाहनों की जांच तेज कर दी है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं। पुलिस बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों और निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
1 नवंबर को अभियान के पहले दिन करीब 15 हजार वाहनों की जांच की गई थी। इस दौरान PUCC नियमों के उल्लंघन पर 566 चालान जारी किए गए। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी 7,279 वाहनों की जांच कर 714 वाहनों को वापस भेजा और 38 वाहनों को जब्त किया।
नए नियमों के तहत बीएस-6 मानकों से कम श्रेणी के कुछ बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। सीएनजी, इलेक्ट्रिक और निर्धारित मानकों वाले वाहनों को नियमानुसार प्रवेश की अनुमति है। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और मौसमी परिस्थितियां दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र रखने, निजी वाहनों का अनावश्यक उपयोग कम करने और निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की है।
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