नई दिल्ली: वामपंथी राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया से पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित हो सकते हैं।
ये प्रदर्शन “People Against SIR” के बैनर तले आयोजित किए गए। इनमें All India Students’ Association (AISA) सहित छात्र समूहों, वाम दलों और अन्य नागरिक समाज संगठनों के सदस्य शामिल हुए। प्रदर्शनकारी Bangla Sahib Gurudwara, Jantar Mantar और Election Commission of India मुख्यालय के आसपास सहित कई स्थानों पर जुटे।
प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया वापस लेने और उन लोगों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की, जिनके नाम उनके अनुसार मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग की, जिसमें चयन समिति में Chief Justice of India को फिर से शामिल करना शामिल है।
वाम दलों और नागरिक समाज से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने प्रदर्शनों का समर्थन किया। इनमें CPI(M) नेता Brinda Karat, CPI(ML) Liberation के महासचिव Dipankar Bhattacharya, RJD सांसद Manoj Jha, वकील Prashant Bhushan और कार्यकर्ता Yogendra Yadav शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने October 23 के प्रदर्शनों के दौरान अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया।
Election Commission का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान कर मतदाता सूचियों की शुद्धता बेहतर करना है। SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद जारी है और विपक्षी समूह पात्र मतदाताओं के लिए अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी दल November 1 को दिल्ली में बड़ी रैली की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए आगे और प्रदर्शन होने की संभावना है।
Hashtags: #दिल्लीराज्य #दिल्ली #वामदल #मानवश्रृंखला #ज्ञानेशकुमार #SIR #मतदातासूची #दिल्लीमेंवामदलों #DelhiState #Delhi