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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोविड महामारी के दौरान सरकारी अस्पतालों को कोविड केंद्र घोषित किए जाने के कारण यदि सामान्य मरीजों को जरूरी उपचार नहीं मिल पाता और उन्हें निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है, तो सरकार चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति से इनकार नहीं कर सकती। अदालत ने दिल्ली सरकार को मान्यता प्राप्त पत्रकार रविंदर गुप्ता की पत्नी के इलाज पर खर्च हुई 11.83 लाख रुपये की शेष राशि आठ सप्ताह के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने 29 अक्टूबर को दिए फैसले में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक की ओर से 21 जुलाई 2025 को जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पत्रकार का चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा खारिज किया गया था। अदालत ने कहा कि सरकारी अस्पताल में हड़ताल और अस्पताल को कोविड केंद्र घोषित किए जाने की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन दोनों स्थितियों में सामान्य मरीजों को नियमित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं।

मामले के अनुसार, रविंदर गुप्ता की पत्नी को अगस्त 2021 में तत्काल सर्जरी की आवश्यकता थी। वह इलाज के लिए जीबी पंत अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें सर गंगा राम अस्पताल रेफर किया गया। बाद में सर गंगा राम अस्पताल और सर गंगा राम सिटी अस्पताल में उनका उपचार हुआ। इस पर कुल खर्च की शेष 11,83,105.21 रुपये की राशि की प्रतिपूर्ति मांगी गई थी।

गुप्ता ने दिल्ली प्रेस रिपोर्टर एवं चिकित्सा सहायता नियम, 1955 के तहत दावा किया था। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने सर्जरी को आपातकालीन नहीं मानते हुए भुगतान से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलील स्वीकार नहीं की और कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज उपलब्ध न होने के कारण मरीज को निजी अस्पताल जाना पड़ा। अदालत ने प्रतिपूर्ति का दावा खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। साथ ही, जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी से राशि वसूलने की स्वतंत्रता भी सरकार को दी है।


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