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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साकेत कोर्ट के एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दे दी गई है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता (आपराधिक) अमोल सिन्हा ने दो नवंबर को इस संबंध में अपनी सहमति दी थी। हालांकि, यह अभी अवमानना का अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है।

मामला साकेत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडेय के एक आदेश से जुड़ा है। रत्ना सिंह ने 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस पर कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने और प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने का आरोप लगाते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर न्यायिक अधिकारी के कामकाज और आदेश को लेकर टिप्पणियां की थीं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी पोस्ट में न्यायिक अधिकारी को किसी बाहरी व्यक्ति के निर्देश पर काम करने वाला बताया गया।

अधिवक्ता कौशिक चटर्जी ने 14 अक्टूबर को इस मामले में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दी थी। इसके बाद 28 अक्टूबर को पूरक प्रतिवेदन भी सौंपा गया। अमोल सिन्हा ने अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 15(2) के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेश की निष्पक्ष आलोचना और किसी न्यायिक अधिकारी की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाली टिप्पणियों में अंतर है। दिल्ली पुलिस और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट व्यवस्था की आलोचना से जुड़ी बाद की पोस्ट को उन्होंने अलग विषय माना है।

अब दिल्ली हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से तय करेगा कि रत्ना सिंह की टिप्पणियां आपराधिक अवमानना के दायरे में आती हैं या नहीं।


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