आई टी डी सी न्यूज़- खुशी सिंह

मैं पढ़ना चाहता हूं, आखिर क्यों मुझे ये काम करने के लिए यहां भेजा जा रहा, मैं रोज़ सुबह कुछ बच्चों को अपने कंधों पर बसता टांगे देखता हूं उनके कंधों पर एक बोझ है जो मेरे कंधों पर भी है पर हम दोनों के कंधों का बोझ बहुत अलग है। उनके कंधों पर खुशियों का बोझ है तो मेरे कंधों पर जिम्मेदारियों का। जिम्मेदारी इतनी सी उम्र में मुझे क्यों मिली, आखिर क्या दोष था मेरा, मैं भी पढ़ना चाहता था, मैं भी दोस्तों के साथ खेलना चाहता था अपना नाम कमाना चाहता था जिंदगी में कुछ करना चाहता था लेकिन यहां तो मैं सिर्फ मजदूरी कर रहा हूं और दिन भर में ₹10 कमा रहा हूं, अपने घर वालों का हाथ बटा रहा हूं उनके लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रहा हूं लेकिन खुद की जिंदगी की कीमत देकर खुद की खुशियों का गला घोट कर।

यह कहानी सिर्फ किसी एक बच्चे की नहीं हे यह हमारे देश के ऐसे कई लाखों-करोड़ों बच्चों की कहानी हे जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन उनकी घर कि स्तिथि के कारण उनकी आर्थिक व्यवस्था के कारण वह पढ़ नहीं पाते। उनके घर वाले उन्हें बाहर काम पर भेज देते हैं, उन्हें लगता है कि अब उनका बच्चा भी घर में पैसे कमा कर लाएगा तो घर में दो वक्त की रोटी तो आएगी। बाल मजदूरी सबसे बड़ा पाप सबसे बड़ा गुनाह है, भारतीय संविधान के अनुसार किसी उद्योग, कारखाने या किसी कंपनी में मानसिक या शारीरिक श्रम करने वाले 5 – 14 वर्ष उम्र के बच्चों को बाल श्रमिक कहा जाता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार – 18 वर्ष से कम उम्र के श्रम करने वाले लोग बाल श्रमिक हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार – बाल श्रम की उम्र 15 साल तय की गई है। भारत सरकार ने बाल श्रम को समाप्त करने हेतु 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित किया बाल श्रम अधिनियम 1986 के अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति अपने व्यवसाय के उद्देश्य से 14 बर्ष से कम आयु के बच्चे से कार्य कराता है, तो उस व्यक्ति को 2 साल की सज़ा और 50 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। यदि हम बाल मजदूरी रोकना चाहते हैं तो हमें उसके लिए सबसे पहले हमारे देश से गरीबी हटानी होगी और शिक्षा
को आगे लाना होगा।

क्योंकि जो व्यक्ति शिक्षित नहीं उसे शिक्षा के बारे में क्या पता ? यदि हमारे देश में पढ़ाई को महत्त्व दिया जाने लगा तो हमारे देश की गरीबी बहुत कम हो जाएगी, हमारा देश प्रगति कि और आगे बढ़ेगा और कई मासूम छोटे बच्चे भी स्कूल जा पाएंगे। देश में 4.5 मिलियन लड़कियां और 5.6 मिलियन लड़के बाल मजदूरी कर रहे हैं ,हम चाहे तो हम यह सब रोक सकते हैं करना सिर्फ एक नयी शुरुआत हे, यदि आपको कहीं भी बाल मजदूरी करते हुए कोई भी बच्चा दिखे तो आप इस नंबर पर मैसेज या कॉल कर सकते हैं 1098 हमारा एक कदम ना जाने कितनी जिंदगियां बचा सकता है।
बाल श्रम आज ही रोके।