सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : नई दिल्ली/चंडीगढ़: 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के संभावित पुनर्मिलन को लेकर राजनीतिक बातचीत तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों दल चुनावी गठबंधन की संभावनाएं तलाश रहे हैं, लेकिन सीटों का बंटवारा समझौते को अंतिम रूप देने में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में एनडीए सरकार की संभावना पर बयान के बाद अटकलों को और बल मिला। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने यह देखना शुरू किया कि 2020 में अलग हुए ये दोनों पूर्व सहयोगी क्या फिर से अपनी साझेदारी खड़ी कर सकते हैं।

पार्टी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि भाजपा पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 35 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर सकती है, जबकि अकाली दल बड़ी हिस्सेदारी पर चुनाव लड़ सकता है। हालांकि, किसी भी दल ने सीट बंटवारे के अंतिम फार्मूले की औपचारिक पुष्टि नहीं की है और ये आंकड़े अभी बातचीत के दायरे में हैं।

सीटों के बंटवारे का मुद्दा दोनों दलों के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्रों के कारण जटिल है। भाजपा आम तौर पर शहरी सीटों पर केंद्रित रही है, जबकि अकाली दल की ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति रही है। रिपोर्टों के अनुसार, अकाली दल कुछ अर्ध-शहरी सीटों पर भी चुनाव लड़ने में रुचि रखता है, जिनमें वे सीटें भी शामिल हैं जहां भाजपा अपनी चुनावी ताकत मानती है।

दोनों दल 1996 से 2020 तक सहयोगी रहे और 1997, 2007 तथा 2012 के विधानसभा चुनावों के बाद पंजाब में साथ मिलकर सरकारें बनाईं। यह गठबंधन तब खत्म हुआ जब अकाली दल ने केंद्र के कृषि कानूनों और किसान आंदोलन पर मतभेदों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला किया।

इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं और दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ चुके हैं। नई बातचीत को अगले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी चुनावी रणनीतियों के पुनर्मूल्यांकन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सीट बंटवारे से आगे, नेतृत्व, नीतिगत प्रतिबद्धताओं और पंजाब से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दे भी बातचीत को प्रभावित कर सकते हैं। अकाली दल पहले नदी-जल बंटवारे, पंजाबी भाषी क्षेत्रों और चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने जैसे मुद्दों पर जोर देता रहा है।

फिलहाल प्रस्तावित गठबंधन बातचीत के स्तर पर है। अंतिम चुनावी व्यवस्था स्पष्ट होने से पहले औपचारिक घोषणा और सीट बंटवारे के सहमत फार्मूले की जरूरत होगी।


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