सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता- ज्ञान से नवाचार विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ l कार्यशाला में मुख्य वक्ता सुनील जैन, राज्य सूचना अधिकारी, नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर, मध्य प्रदेश उपस्थित रहेl कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर मिलिंद दांडेकर ने की इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कंप्यूटर विज्ञान विषय की प्रोफेसर माया इंग्ले, अनिरुद्ध नागाईच, शिल्पा भालेराव, वंदना कांटे विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित हुए और विभिन्न विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये l कार्यक्रम में मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय तथा अन्य महाविद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे l

मुख्य वक्ता सुनील जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि कृत्रिम बौद्धिकता का भारतीय ज्ञान प्रणाली में उपयोग बहुत ही कम हुआ हैl उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वही चीज बरकरार रहेगी जो वैज्ञानिक हो और जिसका ठोस कारण होl हमारे ज्ञान संपदा का केवल 20 से 30% ज्ञान का ही दस्तावेजीकरण हुआ है l उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमारे परंपराओं और रीति रिवाज के पीछे एक वैज्ञानिक कारण होता है और यह रीति रिवाज इतने समय से लगातार चल रहे हैं , इसका मतलब कि उनके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण अवश्य हैं l सुनील ने कहा कि हमारे लिए वही नवाचार उपयोगी है जो आम जनता तक आसानी से पहुंच जाए l यह नवाचार इको फ्रेंडली होने चाहिए और आम जनमानस की पहुंच में भी होना चाहिए l उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान की धरोहर को हमें सबसे पहले उसका दस्तावेजीकरण करना होगा और इन दस्तावेजों का डिजिटल कारण करना आवश्यक है और इसके बाद इसको मशीन लैंग्वेज मॉडल में परिवर्तित किया जाना है l इस मॉडल से आम जनों की समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी l उन्होंने कहा कि आजकल भारतीय ज्ञान परंपरा में काफी काम किया जा रहा हैl उन्होंने कहा कि कृत्रिम बौद्धिकता केवल एक टूल है और इसका सही इस्तेमाल करना हमारा कर्तव्य है l उन्होंने कहा कि अभी हम कृत्रिम बौद्धिकता की क्षमता कम केवल 30% के उपयोग कर रहे हैं l

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु मिलिंद दांडेकर ने कहा कि कृत्रिम बौद्धिकता का उपयोग जनता के लाभ के लिए होना चाहिए और तकनीक का उपयोग लोक कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए होl उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक सतत प्रक्रिया है l उन्होंने इस संदर्भ में धर्मपाल के शोधों का संदर्भ देते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के आने के पूर्व की शिक्षा प्रणाली पर विस्तार से अध्ययन किया है l दांडेकर ने इस अवसर पर भारतीय ज्योतिष विज्ञान के वैज्ञानिक एवं गणितीय पहलुओं पर भी प्रकाश डाला l उन्होंने कहा कि हम कृत्रिम बौद्धिकता का जो भी उपयोग करें वह आमजन के लिए उपयोगी साबित होना चाहिए l तकनीकी नवाचार में मनुष्य की सृजनशीलता का ह्रास नहीं होना चाहिए l मनुष्य की सृजन शीलता उसका आध्यात्मिक चिंतन में बाधा ना डालते हुए नई तकनीक का जन – मानस की भलाई के उपयोग होना चाहिएl कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव अरुण सिंह चौहान ने किया l

इस कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की माया इंग्ले ने भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बौद्धिकता के संदर्भ में- ज्ञान, सीखना और अर्वाचीन औचित्य विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया l उन्होंने कहा कि भारत के दर्शन दुनिया के सबसे समृद्धशाली दर्शन हैं l हमारा अध्यात्म जीने की कला सिखाता है l उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में अभिवादन की संस्कृति, भारतीय एकीकृत परिवार, भारत के विभिन्न नृत्य स्वरूप, भारतीय त्योहार, भारतीय मंदिर और उनका स्थापत्य, भारत की विभिन्न धार्मिक परंपराएं, भारतीय भोजन और उनके वैज्ञानिक पहलू ,भारत के पहनावे, भारतीय कला, भारतीय कला रूपों के प्रकार, भारतीय भाषाएं और लिपियां भारतीय साहित्य आदि पर विशेष रूप से प्रकाश डाला l इसी क्रम में अनुग्रह नगाइच ने कृत्रिम बौद्धिकता का इस्तेमाल भारतीय ज्ञान का संरक्षण, खोजना तथा उसके वितरण के संदर्भ में अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया l उन्होंने बताया कि किस प्रकार भारत सरकार भारतीय भाषाओं, बोलियां आदि के डाटाबेस तैयार करने का काम कर रही है l उन्होंने बताया कि ज्ञान भारत मिशन के द्वारा 74 लाख पुराने दस्तावेजों को संरक्षित कर डिजिटाइज किया गया हैl

द्वितीय तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉक्टर शिल्पा भालेराव ने अपने व्याख्यान में भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बौद्धिकता के भाषा और उसके लॉजिक पर अपना विचार प्रस्तुत किया l उन्होंने कहा कि हमारे डाटा की गुणवत्ता पर ही हमारा परिणाम निर्भर करता है l भारतीय ज्ञान प्रणाली के लिए हमें अधिक से अधिक डाटा का सृजन करना होगा l उन्होंने कृत्रिम बौद्धिकता से संबंधित विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर और टूल्स का परिचय भी दिया है l इसी सत्र में वंदना कांटे ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के टूल्स के माध्यम से इमेज एडिटिंग, वीडियो निर्माण करना तथा टेक्स्ट प्राम्प्ट बनाना सिखाए l कार्यशाला के अंत में कार्यशाला समन्वयक मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय की आईटी विभाग की निदेशक प्रो. प्रज्ञा शुक्ला ने कार्यशाला का सारांश प्रस्तुत कियाl इस अवसर पर मुद्रण एवं वितरण विभाग की निदेशक विभा मिश्रा ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए l कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय की वरिष्ठ सलाहकार निधि रावल गौतम द्वारा किया गया तथा तकनीकी सत्र का संचालन शिवांगी दुबे ने किया lगा।


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