आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : -राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में “स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में सम्पन्न हुआ । कार्यशाला में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध 40 शासकीय के निजी शिक्षा संस्थानों के समन्वयक प्रतिनिधि शामिल हुए ।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि वैभव सुरंगे (राष्ट्रीय संयोजक एन सी एस टी नईदिल्ली) मुख्य वक्ता शशि ठाकुर (सलाहकार राष्ट्रीय महिला आयोग नईदिल्ली थी | अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति सुनील कुमार ने की |
इस अवसर पर सोनम निनावा ( सदस्य बाल संरक्षण आयोग मध्यप्रदेश) एवं सुधीर सिंह भदौरिया(डायरेक्टर यूआईटी आरजीपीवी) भी मंचासीन थे।
कार्यशाला का प्रारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्वलन कर किया गया। अतिथियों के स्वागत उपरांत कार्यशाला की प्रस्तावना रखते हुए रविन्द्र रंदा ने कहा कि युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान से अवगत कराने के लिएआयोग द्वारा पूरे देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति सुनील कुमार ने कहा कि हमारी राष्ट्रीयता भारतीयता है | हम अपने भारतीय होने पर गर्व करें जनजातीय नायकों के योगदान से युवा पीढ़ी को अवगत करवाएं यह अत्यंत प्रासंगिक है।
इस अवसर पर वैभव सुरंगे ने कहा कि अंग्रेजो के विरुद्ध पहला प्रतिरोध जनजाति नायक तिलका मांझी ने कीट था | 1780 से 1857 तक देश मे संथाल क्रांति अंग्रेजो के विरुद्ध चली इसके उपरांत की क्रांति को इतिहास में ज्यादा स्थान मिला लेकिन वास्तविक क्रांति की शुरुआत जनजाति नायकों से शुरू हुई थी इसे “पहाड़िया क्रांति” के नाम से भी जाना जाता है। महाराणा प्रताप का तिलक पुंजा भील ने किया था हल्दी घाटी का युद्ध प्रमुखता से भीलों द्वारा लड़ा गया इसका इतिहास में काम जिक्र होता है। एकलव्य, बर्बरीक, बिरसा मुंडा एवं टंट्या भील जैसे जनजातीय नायकों के पुरुषार्थ से युक्त योगदान से युवा पीढ़ी को अवगत कराना चाहिए ।
उन्होंने कहा कि वास्तव में हमे जाना उस और है, जहां कोई वंचित नही बचे,आज जनजातीय समाज की संस्कृति को बचाते हुए उनका विकास किया जाना बहुत जरूरी है।
इस अवसर पर शशि ठाकुर ने कहा कि हम ऋषि संतान हैं, यह हमारा गौरव है। सामाजिक एवं सांस्कृतिक आक्रमण के कारण भारतीय संस्कृति प्रभावित हुई | आज भारत के जनजाति समाज के अवदान के बारे में पूरे देश को बताते हुए उन्हें मुख्यधारा में जोड़े रखना जरूरी है ।
कार्यक्रम के अंत मे आभार प्रदर्शन रविन्द्र रंदा ने किया ।
कार्यशाल तीन सत्रों में सम्पन्न हुई जिसमें आगामी समय मे शासकीय एवं निजी तकनीकी शिक्षा संस्थानों में कार्यक्रम आयेजित करने की योजना पर विस्तृत चर्चा हुई ।