आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिन के दौरे पर अमेरिका में हैं। गुरुवार को स्टेट डिनर के दौरान मोदी के सामने शुद्ध शाकाहारी भोजन पेश किया गया। इसमें नींबू-डिल दही सॉस, कुरकुरा बाजरा केक, मसालेदार बाजरा, कम्प्रेस्ड तरबूज, भरवां पोर्टोबेलो मशरूम, मलाईदार केसर वाला रिसोट्टो, गुलाब और इलायची वाला स्ट्रॉबेरी शॉर्टकेक शामिल रहे।

इससे पहले भारत आए अमेरिकी राष्ट्रपतियों के स्टेट डिनर का मेन्यू भी कई बार चर्चा का विषय रहा है। डिनर और ऑफिशियल लंच के जरिए हर बार अमेरिका के सामने पूरे भारत की झलक पेश की गई। भारत आए पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के लिए अमेरिका से बार्ले वॉटर और दूसरे देशों से स्टेक मंगवाया गया था। वहीं रिचर्ड निक्सन तो वेजिटेरियन खाना देखकर नाराज होकर लौट गए थे।

आज हम आपको बताएंगे कि अब तक कौन-कौन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आ चुके हैं, उनकी यात्रा का मकसद क्या रहा है और इस दौरान उनके सामने खाने के लिए क्या-क्या पेश किया गया…

ड्वाइट आइजनहावर (दिसंबर 1959)- ताजे फल और अमेरिका का बार्ले वॉटर

अमेरिका के ड्वाइट आइजनहावर वो पहले राष्ट्रपति थे जो भारत दौरे पर आए थे। ये दौरा ऐसे वक्त पर हुआ था जब भारत भयंकर सूखे से उबर रहा था और देश में महंगाई अपने चरम पर थी। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और फॉरेन एक्सचेंज बेहद कम था। इसके अलावा भारत को लोकतांत्रिक देश के तौर पर उभरता देख अमेरिका, रूस के प्रभाव को भी कम करना चाहता था। जब ड्वाइट राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे तो उन्हें सबसे पहले द्वारका सुइट के सिटिंग रूम में कॉफी पिलाई गई थी।

ड्वाइट स्टेक और डीकैफ कॉफी के शौकीन थे। उस वक्त भारत में ये सामान नहीं मिलता था। विदेश मंत्रालय ने इसे खास दूसरे देशों से मंगवाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए खाना बनाने वाले शेफ को सख्त हिदायत दी गई थी कि उनके खाने में फैटी ऐसिड बिलकुल भी मौजूद न हो। ड्वाइट को ताजे फल और खासकर आम काफी पसंद थे, इसलिए उनके लिए सबसे बेहतरीन क्वालिटी के आमों की व्यवस्था की गई थी। जिस रूम में वो ठहरे थे वहां भी आम रखे गए थे ताकि वो बीच में भी उसे खा सकें।

साथ ही राष्ट्रपति के लिए अमेरिका से खास बार्ले वॉटर भी मंगवाया गया था। ड्वाइट पूरी व्यवस्था से काफी खुश हुए थे और उन्होंने राष्ट्रपति भवन के स्टाफ का शुक्रियादा भी किया था।

रिचर्ड निक्सन (अगस्त, 1969)- शाकाहारी खाना देख नाराज हुए

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन भारत में सिर्फ 23 घंटे रुके थे। निक्सन पाकिस्तानी सपोर्टर थे और वो भारत की गुटनिरपेक्ष नीति के खिलाफ थे। उस वक्त अमेरिका का मानना था कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। वो भारत को सोवियत संघ की कठपुतली मानते थे। अल जजीरा के मुताबिक, रिचर्ड के इस दौरे का फोकस इंदिरा गांधी से रिश्ते सुधारना था। दरअसल, वो भारत और इंदिरा गांधी को लेकर कई मौकों पर रेसिस्ट कमेंट कर चुके थे।

राष्ट्रपति बनने से पहले 1960 के दशक में जब निक्सन भारत आए थे तब नेहरू सरकार के सीनियर मिनिस्टर मोरारजी देसाई ने उनका स्वागत किया था। देसाई ने निक्सन के लिए खाने में सिर्फ वेजिटेरियन डिश ही रखी थीं, जबकि निक्सन नॉन-वेज और अल्कोहल के खासा शौकीन थे। देसाई की खातिरदारी से नाराज होकर निक्सन भारत से चले गए थे। उनके दौरे में अगला स्टॉप पाकिस्तान था।