सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच लेबनान और इजरायल के बीच प्रस्तावित युद्धविराम समझौता एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हिजबुल्लाह ने सीजफायर प्रस्ताव को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इजरायली सेना पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से वापस नहीं जाती, तब तक किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने की संभावना फिलहाल कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
किस मुद्दे पर फंसी है बातचीत?
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया था। इजरायल चाहता है कि सीमा से लगे क्षेत्रों में हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर रोक लगे और वहां सुरक्षा नियंत्रण को मजबूत किया जाए।
वहीं हिजबुल्लाह का कहना है कि ऐसी किसी भी व्यवस्था से पहले इजरायल को लेबनानी क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह समाप्त करनी होगी। यही शर्त दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गई है।
हिजबुल्लाह की दो टूक
हिजबुल्लाह नेतृत्व ने कहा है कि वर्तमान प्रस्ताव लेबनान के हितों की रक्षा नहीं करता। संगठन का मानना है कि यदि इजरायली सेना की वापसी का स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप नहीं दिया जाता, तो युद्धविराम का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
हिजबुल्लाह का आरोप है कि प्रस्तावित समझौता इजरायल को रणनीतिक लाभ पहुंचा सकता है, जबकि लेबनान की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।
इजरायल क्यों अड़ा हुआ है?
इजरायल का तर्क है कि उसकी प्राथमिकता सीमा क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उसका कहना है कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं और सीमा के निकट उसकी गतिविधियों को नियंत्रित किए बिना स्थायी शांति संभव नहीं है।
इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान का मानना है कि जल्दबाजी में सेना हटाने से भविष्य में फिर से सुरक्षा संकट पैदा हो सकता है। इसी वजह से वह अपनी शर्तों पर कायम है।
बढ़ सकती है क्षेत्रीय चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा चलता है तो पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है। लेबनान-इजरायल सीमा पर लगातार तनाव न केवल दोनों देशों बल्कि क्षेत्र की व्यापक सुरक्षा स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा ईरान, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका भी इस संकट को और जटिल बना रही है।
क्या निकल पाएगा समाधान?
राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी मूल शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। हिजबुल्लाह इजरायली सेना की पूर्ण वापसी चाहता है, जबकि इजरायल पहले सुरक्षा गारंटी और सीमा क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।
यही कारण है कि प्रस्तावित लेबनान डील फिलहाल अधर में लटकी हुई है।
निष्कर्ष
हिजबुल्लाह द्वारा सीजफायर प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद लेबनान में शांति प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है। इजरायली सेना की वापसी और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। जब तक इन मूल मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक युद्धविराम समझौते की राह आसान दिखाई नहीं देती।
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