आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: 2013 में चीन और पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बिजनेस बढ़ाने के लिए चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC की शुरुआत की थी। ये कॉरिडोर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनीशिटिव (BRI) के तहत शुरू किया गया था। इस साल CPEC और BRI के दस साल पूरे हो चुके हैं। चीन और पाकिस्तान का CPEC प्रोजेक्ट PoK से होकर गुजरता है।

इसके चलते भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। इन प्रोजेक्ट्स की दसवीं सालगिरहा मनाने के लिए रविवार को एक तरफ जहां चीन के वाइस प्रीमियर यानी उप प्रधानमंत्री ही लिफेंग इस्लामाबाद पहुंचे।

वहीं, पाकिस्तान में रविवार को खैबर पख्तूनख्वा राज्य के बाजौर में आतंकी हमले में 44 लोगों की मौत हो गई। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है। इसके बावजूद इस्लामाबाद की सरकारी इमारतों को रोशनी जगमगाया गया है। सड़कों पर चीन और पाकिस्तान के झंडे लगाए गए हैं।

आतंक के बीच फंसी चीन-पाक की दोस्ती

CPEC के तहत चीन पाकिस्तान में ट्रांसपोर्ट, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रकटर प्रोजेक्टस में 60 अरब डॉलर (करीब 4.9 लाख करोड़ रुपए) का निवेश कर रहा है। अब तक इस पर करीब 40 अरब डॉलर खर्च भी हो चुके हैं। इस्लामाबाद युनिवर्सिटी के प्रोफेसर अजीम खालिद का कहना है कि अब तक CPEC के मिले-जुले नतीजे देखने को मिले हैं।

पाकिस्तान के नेता चीन से दोस्ती को हिमालय से मजबूत, समुद्र से गहरी और शहद से मीठी बताते हैं। हालांकि, ये दोस्ती आतंक की चपेट में है। दरअसल, CPEC चीन के शिनजिआंग इलाके को पाकिस्तान में बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है।

शुरुआत में दावा किया गया था कि इस प्रोजेक्ट से बलूचिस्तान के लोगों को फायदा मिलेगा। हालांकि, ये दावा गलत साबित हुआ। नतीजा ये रहा कि बलूच अलगाववादी संगठन BLA ने CPEC के प्रोजेक्ट्स पर कई हमले किए। सरकार को ये हमले रोकने के लिए वहां AK 47 के साथ हजारों सैनिकों को तैनात करना पड़ा है।

पाकिस्तान में चीन के नागरिकों पर हुए हमले…

2021 में BLA ने चीनी इंजीनियरों को दासू डैम प्रोजेक्ट साइट पर ले जा रही बस को उड़ा दिया था। इसमें 9 इंजीनियरों समेत कुल 13 लोग मारे गए थे।

कराची यूनिवर्सिटी में चीन की महिला प्रोफेसरों की वैन पर BLA की महिला फिदायीन ने हमला किया था। इसमें 6 लोग मारे गए थे। इनमें से 5 चीनी थे।

पेशावर में एक चीनी डॉक्टर के परिवार पर हमला हुआ था। कुल चार लोग मारे गए थे।

अप्रैल 2021 में क्वेटा के फाइव स्टार होटल में अटैक हुआ। ये होटल चीन के राजदूत की मेजबानी कर रहा था। हमले में 5 लोगों की मौत हुई।

चीन बीच में ही छोड़ रहा पाकिस्तान का साथ?

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि चीन कर्ज देने के लिए ज्यादातर ऐसे देशों को चुनता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार या उसके अपने ट्रेड रूट में कोई अहम स्थान रखते हों। वो इन देशों में ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लोन देता है। इन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से ज्यादातर वो होते हैं जो किसी न किसी रूप में चीन के लिए जरूरी होते हैं।

वो कई ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए भी लोन देता है जो उस देश के लिए किसी काम के नहीं होते। पाकिस्तान को दिया गया चीन का ज्यादातर कर्ज चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के नाम पर है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कॉरिडोर का कुछ हिस्सा चीन रणनीतिक रूप से काफी जरूरी मानता है। इस जरूरी हिस्से का काम चीन लगभग पूरा कर चुका है। अब उसने CPEC में निवेश भी घटाना शुरू कर दिया है। चीन ने श्रीलंका के बाद अपने फायदे के लिए पाकिस्तान को भी कर्ज के जाल में फंसा लिया है।