आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत में एक और राज्य सरकार ‘मंदिर मार्ग’ पर चल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की द्रमुक सरकार ने पिछले दो साल के दौरान राज्य के लगभग 44 हजार मंदिरों की 4500 एकड़ भूमि से कब्जा छुड़ाया है। इस जमीन की कीमत लगभग 42 सौ करोड़ रुपए बताई जाती है। साथ ही राज्य के 11 बड़े मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को नाश्ता देना भी शुरू किया है।

तमिलनाडु के 11 मंदिर चुने, जिनमें डेढ़ लाख लोग रोज आते हैं

इन मंदिरों में पेरियापालयम भवानी अम्मान मंदिर, परमेश्वरी मंदिर और अन्नामलाई मंदिर शामिल हैं। राज्य के इन 11 मंदिरों में रोज लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। DMK सरकार ने मंदिरों से संचालित लगभग 3 हजार स्कूलों में दोपहर का पोषाहार शुरू किया है।

ऐसे में खुद को धार्मिक तुष्टिकरण से परे तर्कवादी बताने वाली सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा सहित अन्य दक्षिणपंथी पार्टियों को राज्य में पांव जमाने का कोई मौका नहीं देना चाहती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में 2.6 फीसदी वोट पाने वाली भाजपा का 2022 के शहरी निकाय चुनावों में वोट शेयर 5.41% हो गया। पहली बार भाजपा के 308 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। पिछले निकाय चुनावों में भाजपा के 118 उम्मीदवार ही जीते थे।

मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 340 करोड़ का फंड

द्रमुक सरकार ने 1000 साल पुराने मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 340 करोड़ रु का फंड रखा है। हिन्दू रिलीजियस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट विभाग के मंत्री सेखर बाबू ने जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के लिए अलग टीम बनाई है। हालांकि, कांचीपुरम मंदिर के मुख्य पुजारी नटराज शास्त्री का कहना मंदिरों के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

दरअसल, राज्य में पिछले कुछ समय से भाजपा, विपक्षी दल और कुछ अन्य हिंदूवादी संगठन मंदिरों की जमीन पर अतिक्रमण और मंदिरों के स्कूलों में सुविधाओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।