सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में मंगलवार, विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में आईसीएमआर—राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (एनआईआरईएच) के निदेशक राजनारायण तिवारी और भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मनीष शर्मा मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर संस्थान के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक अनुराग यादव, चिकित्सक, शोधकर्ता, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। राजनारायण तिवारी ने इस वर्ष की थीम साथ मिलकर स्वास्थ्य – विज्ञान के साथ की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि भ्रामक सूचनाओं और अप्रमाणित उपचारों से लोगों को गंभीर नुकसान हुआ। ऐसे समय में विज्ञान और प्रमाण आधारित चिकित्सा ही समाज को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर और डीएचआर द्वारा विभिन्न बीमारियों के उपचार से संबंधित साक्ष्यों का संग्रह कर राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं, जिससे चिकित्सकों को वैज्ञानिक निर्णय लेने में सहायता मिलती है। मनीष शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों का दायित्व है कि आमजन तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ सेवाएं पहुंचें। उन्होंने मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और विनम्रता से संवाद करने पर बल दिया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, इसलिए अद्यतन रहना आवश्यक है। मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि आईसीएमआर द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल बीएमएचआरसी में प्रभावी रूप से लागू किए जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और एचपीवी वैक्सीन पंजीयन का आयोजन भी किया गया। तिवारी ने वन हेल्थ अप्रोच को भविष्य की महामारियों से निपटने की कुंजी बताया। उन्होंने बताया कि मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समेकित प्रयासों से ही संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण मानव-पशु संपर्क बढ़ रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। भारत सरकार का “राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन” इसी दृष्टिकोण पर आधारित है।
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