सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वैद्यरत्नम समूह ने जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, यूएसए के साथ अनुसंधान सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है, जो आयुर्वेद के इतिहास में अपनी तरह का पहला सहयोग होगा। वैद्यरत्नम और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी मिलकर हृदय रोगों पर शोध करेंगे।

वैद्यरत्नम समूह के प्रबंध निदेशक अष्टवैद्यन डॉ. ई.टी. नीलकंदन मूस ने कहा, “हम इस नए विकास को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वैद्यरत्नम और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी दोनों ही सदियों पुरानी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा हैं। विश्व की सबसे प्रसिद्ध निजी शोध विश्वविद्यालय के साथ हमारा यह प्रस्तावित सहयोग स्वास्थ्य क्षेत्र को व्यापक लाभ प्रदान करेगा।”

प्रबंध निदेशक अष्टवैद्यन डॉ. ई.टी. नीलकंदन मूस और कार्यकारी निदेशक अष्टवैद्यन डॉ. ई.टी. कृष्णन मूस ने बाल्टीमोर कैंपस में विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस बैठक में भारत के नीदरलैंड्स में पूर्व राजदूत डॉ. वेणु राजमोनी, सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (C-MET) के पूर्व निदेशक डॉ. रघु नटराजन और जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. शेल्बी कुट्टी भी उपस्थित रहे।

1876 में स्थापित जॉन्स हॉपकिन्स अमेरिका का पहला शोध विश्वविद्यालय है, जिसने उच्च शिक्षा में क्रांति ला दी और आज भी यह दुनिया भर में ज्ञान और खोजों को आगे बढ़ा रहा है।

वैद्यरत्नम समूह वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान प्रणाली को प्रमाणित करने में अग्रणी है और इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उपकरणों का उपयोग कर रहा है। वैद्यरत्नम की दवाइयां पूरे भारत में 2000 से अधिक डीलरशिप नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध हैं और इन्हें जीसीसी देशों, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में निर्यात किया जाता है।

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