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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन के भीतर नाराजगी दूर करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी करीब 10 हजार ऐसे नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं को मनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिनकी अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है, लेकिन वे लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि आपसी मतभेद चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रदेश के कई जिलों में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान की स्थिति बनी हुई है। कहीं विकास कार्यों का श्रेय लेने को लेकर विवाद है, तो कहीं संगठन में पद और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर नेताओं के बीच मतभेद सामने आए हैं। कुछ स्थानों पर पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल की कमी भी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है।
हाल ही में लखनऊ में आयोजित बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से आपसी नाराजगी और निराशा दूर कर एकजुट होकर काम करने की अपील की थी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संपर्क अभियान तेज किया है।
रणनीति के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से करीब 25 पुराने और प्रभावशाली कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की गई है। पार्टी पदाधिकारी और संघ के प्रतिनिधि इनसे संपर्क कर उन्हें दोबारा सक्रिय करने का प्रयास करेंगे। भाजपा का जोर संगठन में समन्वय बढ़ाने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को एकजुट करने पर है।
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