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उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में प्रदेश के 21 शहरों के शामिल होने का दावा सामने आया है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक हवा की गुणवत्ता खराब होने से लोगों की सांसों पर संकट बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई शहरों में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक श्रेणी तक पहुंच गया है।
6 नवंबर को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ और हापुड़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्रमशः 727 और 718 दर्ज किया गया। इसी सूची में हरियाणा और पंजाब के शहर भी शामिल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ रहा है। हवा की गति कम होने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषक वातावरण में जमा हो रहे हैं।
प्रदूषण के सूक्ष्म कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सांस और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए अधिक रहता है। कुछ रिपोर्टों में मौजूदा प्रदूषण की तुलना रोजाना करीब 50 सिगरेट पीने से होने वाले धुएं के संपर्क से की गई है, हालांकि यह एक सांकेतिक तुलना है।
दीपावली के आसपास पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से खराब हवा को और प्रभावित कर सकता है। ऐसे में त्योहार के दौरान प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य सावधानियां बेहद जरूरी होंगी।
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