सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद अब पार्टी के कई सांसदों के शिंदे खेमे में जाने की अटकलों ने उद्धव ठाकरे के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया घटनाक्रम को राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के नाम से देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अलग समूह बनाकर शिंदे गुट के साथ जाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। खबरों के मुताबिक कुछ सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी स्थिति भी स्पष्ट करने की कोशिश की है। यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए 2022 के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
बढ़ती अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की आपात बैठकें बुलाई हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार संगठन को एकजुट रखने का प्रयास कर रहा है। वहीं सांसदों को पार्टी लाइन पर बनाए रखने के लिए तीन लाइन का व्हिप भी जारी किया गया है।
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने भी लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर संभावित टूट के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी ने मांग की है कि किसी भी अलग गुट को मान्यता देने से पहले संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
हालांकि जिन सांसदों के नाम बगावत से जोड़े जा रहे हैं, उनमें से कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छह सांसदों का समूह वास्तव में शिंदे गुट में शामिल होता है तो लोकसभा में शिंदे की ताकत बढ़ेगी और महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन एक बार फिर बदल सकता है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के लिए यह संगठनात्मक अस्तित्व और नेतृत्व क्षमता की बड़ी परीक्षा साबित होगी।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति की निगाहें 19 जून और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रखने में सफल होते हैं या शिवसेना में एक और बड़ा विभाजन देखने को मिलता है।
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