सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के इतिहास पर नजर डालें तो स्थापना के बाद से शिवसेना छह बार बड़े विभाजन का सामना कर चुकी है। इनमें से चार बड़े विद्रोह सिर्फ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व काल में हुए, जिनसे पार्टी की राजनीतिक ताकत और संगठन दोनों प्रभावित हुए।

उद्धव के नेतृत्व में लगातार चुनौतियां

2019 में महाविकास अघाड़ी सरकार बनने के बाद शिवसेना के भीतर मतभेद बढ़ने लगे। सबसे बड़ा झटका 2022 में लगा, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए। इसके बाद पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी शिंदे गुट को मिल गया।

पहले भी कई बार हुई बगावत

शिवसेना के इतिहास में छगन भुजबल, नारायण राणे और राज ठाकरे जैसे नेताओं ने अलग राह चुनी। राज ठाकरे ने 2006 में अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बनाई, जबकि अन्य नेताओं ने भी समय-समय पर पार्टी छोड़कर नए राजनीतिक विकल्प तैयार किए।

नई पार्टियों का हुआ गठन

शिवसेना से अलग हुए कई नेताओं ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई। इनमें मनसे सबसे प्रमुख उदाहरण है। वहीं कुछ नेता अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों में शामिल होकर अपनी राजनीतिक भूमिका आगे बढ़ाते रहे।

राजनीतिक असर

लगातार विभाजनों ने शिवसेना के संगठनात्मक ढांचे को कमजोर किया है। बालासाहेब ठाकरे के दौर में एकजुट दिखने वाली पार्टी अब कई गुटों में बंटी नजर आती है। आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष को समय रहते नहीं संभाला गया, तो महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।


Hashtags: #PoliticsAdministration #Bhopal #Desksource #एनएन #टवर #आईट #DeskSource #नजर #इनम #गठन