सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी के कथित अल्टीमेटम ने संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को और हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने स्पष्ट संदेश रखते हुए कहा है कि अब नेतृत्व को तय करना होगा कि वह किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
इस बीच पार्टी को एक और बड़ा झटका तब लगा जब एक राज्यसभा सांसद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही हाल के दिनों में इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसदों की संख्या तीन तक पहुंच गई है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है और संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बागी खेमे का दावा है कि लोकसभा में पार्टी के करीब 20 सांसद उनके समर्थन में हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व इन दावों को खारिज कर रहा है और इसे राजनीतिक अफवाह करार दे रहा है।
विधानसभा स्तर पर भी पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चर्चा है कि 58 विधायक एक अलग गुट के रूप में सक्रिय हैं, जिससे संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ है। यदि यह स्थिति आगे बढ़ती है तो पार्टी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट केवल नेतृत्व की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भविष्य की दिशा और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं का मानना है कि संगठन में संवाद और समन्वय की कमी के कारण असंतोष बढ़ा है।
TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट बनाए रखने की है। विपक्ष भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और इसे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहा है।
आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और बागी नेताओं के अगले कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल TMC के भीतर जारी खींचतान राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बनी हुई है।
Hashtags: #PoliticsAdministration #Bhopal #Desksource #बनर #ममत #एनएन #DeskSource #टवर #आईट #Tmc