सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क-आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा मतदान से पहले कांग्रेस ने संभावित राजनीतिक खरीद-फरोख्त और क्रॉस-वोटिंग की आशंका के बीच अपने विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम और कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज होने के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विधायकों को दूसरे स्थान पर ले जाना एहतियाती कदम है, जिसका उद्देश्य पार्टी एकजुटता बनाए रखना और अहम मतदान से पहले निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को रोकना है। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक, सभी विधायकों को चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक साथ रहने के निर्देश दिए गए हैं। यह रणनीति उन स्थितियों में राजनीतिक दलों द्वारा अक्सर अपनाई जाती है, जब किसी महत्वपूर्ण विधायी मुकाबले में अपने संख्या बल को सुरक्षित रखना जरूरी माना जाता है।
हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने घोड़ा-व्यापार के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस के इस फैसले की आलोचना की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कदम विपक्षी खेमे के भीतर भरोसे की कमी को दर्शाता है। उनका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से और लोकतांत्रिक मानकों के अनुरूप कराई जा रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि विधायकों को स्थानांतरित किया जाना मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से जुड़े ऊंचे राजनीतिक दांव को उजागर करता है। इस घटनाक्रम ने राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज कर दी हैं, जहां मतदान से पहले दोनों प्रमुख दल हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि इस चुनाव का नतीजा संसद के उच्च सदन में राजनीतिक संतुलन और दलों के प्रतिनिधित्व पर असर डाल सकता है।
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