Subhashish Panigrahi / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0). Cropped.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को ओबीसी क्रिमी लेयर तय करने के अपने मार्च फैसले को लंबे समय तक टालने की अनुमति नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा 2025 में चयनित ओबीसी उम्मीदवारों के सेवा आवंटन पर भी वही सिद्धांत लागू होगा।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ केंद्र की याचिका सुन रही थी। 11 मार्च के फैसले में कहा गया था कि क्रिमी लेयर का दर्जा केवल माता-पिता की आय पर नहीं टिक सकता। केंद्र ने पदों की समकक्षता तय करने के लिए करीब दो साल मांगे थे और पूरे हो चुके चयन न खोलने को कहा था। कोर्ट को इतनी लंबी मोहलत का ठोस कारण नहीं मिला। पहले दी गई छह महीने की अनुपालन अवधि बढ़ाकर आठ सप्ताह और दी गई।
सीएसई 2025 पर पीठ स्पष्ट थी: सेवा आवंटन अभी लंबित है, इसलिए मार्च वाली क्रिमी लेयर व्याख्या इन ओबीसी उम्मीदवारों पर लागू होगी। दूसरी ओर कोर्ट ने रेखा भी खींची। केवल सिद्धांत साफ होने से पुरानी नियुक्तियां, वरिष्ठता और पूरे हो चुके चयन दोबारा नहीं खोले जाएंगे। मूल मामले में राहत पक्षकारों और हस्तक्षेपकर्ताओं तक सीमित रहेगी, भले ही व्याख्या नजीर के रूप में बाध्यकारी हो।
विवाद 1993 के कार्यालय ज्ञापन और 2004 की सैलरी आय वाली सफाई तक जाता है। उम्मीदवारों का तर्क था कि केवल वेतन आय के आधार पर उन्हें गलत तरीके से क्रिमी लेयर में डाल दिया गया। कई मामलों में हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने राहत दी थी; केंद्र ने उसी लाइन को चुनौती दी थी।
इस साल के बैच के लिए असर यह है कि सरकार की घड़ी छोटी हो गई है और सेवा आवंटन से पहले पद समकक्षता कैसे जांची जाएगी, यह सवाल जीवंत है। जिनकी नियुक्तियां पहले बंद हो चुकी हैं, शुक्रवार का आदेश अतीत खोलने का लाइसेंस नहीं है।
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