सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : भारत के शहरों में नौकरी और रोज़गार की तलाश में लोग अक्सर किराए के मकानों में रहते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब मकान मालिक अचानक किराया (किराया वृद्धि नियम) बढ़ा देता है और न देने पर घर खाली करने का दबाव डालता है। लेकिन क्या यह कानूनी रूप से सही है? जवाब है – नहीं।
भारतीय किराया कानूनों के मुताबिक मकान मालिक बिना नोटिस दिए अचानक किराया नहीं बढ़ा सकता। उसे कम से कम 30 से 60 दिन पहले किरायेदार को लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। इसके अलावा, हर राज्य में किराया वृद्धि की सीमा भी तय है, जो आमतौर पर 5 से 10 प्रतिशत तक होती है।
किरायेदार और मकान मालिक के बीच किया गया किराया एग्रीमेंट इस मामले में सबसे अहम दस्तावेज़ होता है। इसमें यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि कितने समय बाद और कितनी प्रतिशत वृद्धि होगी।
अगर मकान की स्थिति खराब है, मरम्मत नहीं की गई है, या रहने योग्य सुविधाओं की कमी है, तो किरायेदार किराया वृद्धि का विरोध कर सकता है। कई राज्यों में इसके लिए रेन्ट कंट्रोल अथॉरिटी और अदालत में शिकायत करने का भी विकल्प है।
इसलिए, अगर आपका मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया बढ़ा रहा है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आप कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करके उसके फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
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