सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : UPI के बड़े मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू करने के फैसले को लेकर भारतपे के सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने UPI पर किसी भी तरह का शुल्क लगाए जाने को टैक्स वसूली जैसा बताया और कहा कि इससे डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

ग्रोवर ने तर्क दिया कि ₹2,000 से अधिक के लेनदेन संख्या के लिहाज से कम हो सकते हैं, लेकिन इनका कुल भुगतान मूल्य काफी बड़ा है। उन्होंने RBI, बैंकों और NPCI की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि UPI के लिए आखिर किस तरह की सब्सिडी दी जा रही है, जिसकी लागत अब MDR के जरिए पूरी करने की जरूरत पड़ रही है।

वहीं, सरकार के मुताबिक नया MDR ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और पात्र छोटे कारोबारियों के लेनदेन भी जीरो-MDR व्यवस्था में रहेंगे। ₹2,000 से अधिक के निर्धारित मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा, जबकि ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।


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