सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का सबसे बड़ा परिणाम ऊर्जा सप्लाई को लेकर आश्वासन और आर्थिक-तकनीकी सहयोग से जुड़ी 19 समझौतों का होना रहा। भारत ने रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति को लंबे समय तक स्थिर रखने की मांग दोहराई, जिस पर रूस ने “विश्वसनीय और निरंतर सप्लाई” का भरोसा दिया। यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक प्रतिबंधों के बीच रूस भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और भारत को रियायती दरों का लाभ मिलता है।

19 डील में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक, डिजिटल इकोनॉमी, और फार्मा सेक्टर शामिल रहे। दोनों देशों ने घरेलू मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स सुधारने और नई स्टार्टअप-सहयोग योजनाओं पर सहमति जताई।

हालाँकि, इस दौरे में जिन घोषणाओं पर सबसे ज्यादा निगाहें थीं — जैसे फाइटर जेट को-प्रोडक्शन, S-400 के आगे के सौदे, नई सबमरीन परियोजना या अन्य बड़े रक्षा समझौते — वे आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुए। रक्षा वार्ताओं को “आगे बढ़ाने” की बात कही गई लेकिन ठोस  एम ओ यू डील सामने नहीं आई।

विशेषज्ञों के मुताबिक दौरा “रियलिस्टिक और आर्थिक केंद्रित” रहा — जहाँ भू-राजनीतिक दबाव और युद्ध की स्थिति के कारण दोनों देश रक्षा घोषणाओं पर सतर्क दिखे, पर ऊर्जा व आर्थिक साझेदारी पर आक्रामक रूप से आगे बढ़े। कुल मिलाकर, दौरे से व्यापार, ऊर्जा सहयोग और कूटनीतिक जुड़ाव मजबूत हुए, जबकि बड़े रक्षा सौदों के लिए और बातचीत बाकी है।

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