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उत्तर प्रदेश का पीलीभीत जिला अपनी तराई की भौगोलिक पहचान, कृषि, सिख संस्कृति और राजनीतिक इतिहास के कारण खास महत्व रखता है। नेपाल सीमा और उत्तराखंड से सटे इस जिले को यहां की बड़ी सिख आबादी के चलते 'मिनी पंजाब' भी कहा जाता है। खासकर पूरनपुर क्षेत्र में सिख समुदाय की मजबूत मौजूदगी दिखाई देती है।
देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान के सिंध और पश्चिमी पंजाब से आए कई सिख परिवार तराई क्षेत्र में बस गए थे। उन्होंने यहां की जमीन को मेहनत से उपजाऊ बनाया और खेती-किसानी में अपनी पहचान स्थापित की। आज भी जिले की अर्थव्यवस्था में धान, गेहूं और गन्ने की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है। पीलीभीत अपने प्रसिद्ध बांसुरी उद्योग और टाइगर रिजर्व के लिए भी जाना जाता है।
राजनीतिक रूप से पीलीभीत लंबे समय तक गांधी परिवार की सक्रियता का केंद्र रहा है। मेनका गांधी और वरुण गांधी यहां से सांसद रह चुके हैं। जिले में पीलीभीत, बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर चार विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इन सीटों पर सिख, कुर्मी, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाता चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूरनपुर में सिख समुदाय की विशेष मौजूदगी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग सामाजिक समूहों का प्रभाव दिखाई देता है। कृषि, गन्ना भुगतान, धान खरीद और किसानों से जुड़े मुद्दे भी यहां की राजनीति को प्रभावित करते हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पीलीभीत की चारों सीटों पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। जिले की सामाजिक विविधता, किसान मतदाताओं की भूमिका और सिख समुदाय की भागीदारी आगामी चुनावी चर्चा के अहम विषय होंगे।
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