सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुंबई: मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल ने 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन को लेकर जारी विवाद के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का समर्थन किया है। हालांकि, जरांगे ने साफ किया कि इस विवाद में उनका समर्थन मराठा समुदाय की आरक्षण मांगों पर किसी समझौते का संकेत नहीं है।

26 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने कहा कि उन्हें लगता है कि शिंदे को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि यह जांच होनी चाहिए कि उपमुख्यमंत्री के राजनीतिक जीवन को नुकसान पहुंचाने की कोई साजिश तो नहीं है। जरांगे ने कहा कि वे इस मामले में शिंदे के साथ खड़े होने को तैयार हैं, लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर उन्हें जवाबदेह ठहराते रहेंगे।

यह विवाद जरांगे के पहले के उन आरोपों के बाद सामने आया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने उन्हें बताया था कि मराठा आरक्षण आंदोलन को रोकने की कोशिश से कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये जुड़े हैं। उन्होंने शिंदे और उनके बेटे, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे की कथित भूमिका पर स्पष्टीकरण मांगा था। इन आरोपों के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

जरांगे ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और राज्य के वरिष्ठ नेतृत्व से तथ्यों को सामने लाने की अपील की है। विवाद से जुड़े एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे हैं। इसकी प्रामाणिकता और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कुछ राजनीतिक नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है।

शिंदे ने आरोपों को खारिज किया है और जरांगे को चुनौती दी है कि वे संबंधित अधिकारियों के सामने सबूत पेश करें। इस विवाद पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

इस बीच, जरांगे ने दोहराया है कि मराठा आरक्षण का मुद्दा उनकी प्राथमिक चिंता बना हुआ है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर अपने वादे पूरे करने का दबाव बनाए रखा है, जिसमें पात्र मराठाओं के लिए कुणबी प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आसान करना भी शामिल है, ताकि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण लाभ हासिल कर सकें।

जरांगे के ताजा बयान से स्पष्ट है कि वे कथित विवाद पर अपने रुख को आरक्षण के लिए जारी अभियान से अलग रखना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि किसी एक मामले में राजनीतिक समर्थन उन्हें मराठा समुदाय की मांगों पर सरकार के रवैये को लेकर सवाल उठाने से नहीं रोकेगा।


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