सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच बोरवेल के पानी में जहरीले रसायन मिलने का मामला सामने आया है। अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास दत्तनगर इलाके में बोरवेल के पानी के दूषित होने की शिकायतों के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी इस मामले में जवाब मांगा गया है।
बोरवेल के पानी में मिला खतरनाक क्रोमियम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाके के कई निवासियों को पिछले लगभग दो महीनों से पीले रंग का दूषित पानी मिल रहा है। आशंका जताई गई है कि आसपास की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट के रिसाव के कारण भूजल दूषित हुआ है। प्रारंभिक प्रयोगशाला जांच में पानी के एक नमूने में हेक्सावैलेंट क्रोमियम की मात्रा 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। पेयजल में क्रोमियम की निर्धारित सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर है। इस आधार पर नमूने में दर्ज मात्रा निर्धारित सीमा से लगभग एक हजार गुना अधिक बताई गई है।
हालांकि, एक नमूने के आधार पर पूरे क्षेत्र के भूजल की स्थिति या प्रदूषण के सटीक स्रोत की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए व्यापक जांच और अलग-अलग स्थानों से नमूने लेना आवश्यक है।
लोगों के स्वास्थ्य पर चिंता रिपोर्टों में स्थानीय निवासियों ने त्वचा पर चकत्ते, खुजली, फफोले और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की है। दूषित पानी के संपर्क से स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए भी बोरवेल के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। कुछ परिवारों को पीने के लिए साफ पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनके घरेलू खर्च में वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों और पानी में मौजूद रसायनों के बीच संबंध की पुष्टि के लिए स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच भी जरूरी है।
दो सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर मानवाधिकार संबंधी चिंता का विषय है। इसी आधार पर महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी प्रदूषण और संबंधित कार्रवाई के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। प्रशासन के सामने अब दूषित पानी के स्रोत की पहचान करने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जल उपलब्ध कराने और जिम्मेदार औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की चुनौती है।
कुंभ मेले से पहले बढ़ी चिंता नासिक में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोदावरी नदी धार्मिक स्नान और अन्य आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहती है। ऐसे में भूजल प्रदूषण की खबर ने नदी और आसपास के जलस्रोतों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बोरवेल में मिले प्रदूषण से गोदावरी नदी के पानी के दूषित होने की पुष्टि अपने आप नहीं होती। इसके लिए नदी, नालों और संबंधित जलस्रोतों की अलग-अलग वैज्ञानिक जांच जरूरी है। कुंभ मेले से पहले सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता, नियमित परीक्षण और प्रदूषण के स्रोत पर नियंत्रण सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
Hashtags: #MaharashtraState #Bhopal #पहल #Nhrc #एनएन #टवर #आईट #जहर #तनगर #नासिकमेंकुंभसे