सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन के समर्थन की वजह से देश में घिर रहे मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु के लिए मंगलवार 30 जनवरी 2024 का दिन सियासी तौर पर अहम साबित हो सकता है। दो विपक्षी पार्टियां मुइज्जु के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दे सकती हैं। यह जानकारी सोमवार देर रात ‘द सन मालदीव’ वेबसाइट ने दी।
अगर स्पीकर इस प्रस्ताव को कबूल करते हैं और महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करते हैं तो आखिर में वोटिंग होगी। इस प्रोसेस में 14 या 15 दिन लग सकते हैं। लोकल न्यूज वेबसाइट ‘अधाधु’ ने एक्सपर्ट्स के हवाले से कहा है कि मुइज्जु को हटाना फिलहाल आसान नहीं है।
मालदीव की संसद में कुल 87 सांसद हैं। मुइज्जू को सोमवार को एक और कामयाबी मिली। उनकी कैबिनेट के 22 में से 19 मंत्रियों को पार्लियामेंट से अप्रूवल मिल गया।
मुइज्जु को कैसे हटाया जा सकता है
मालदीव की न्यूज वेबसाइट ‘अधाधु’ के मुताबिक महाभियोग प्रस्ताव पारित कराने के लिए 87 में से कम से कम 53 वोट चाहिए होंगे। इसके बाद ही मुइज्जु को राष्ट्रपति पद से हटाया जा सकता है। अभी सिर्फ 34 सांसद महाभियोग प्रस्ताव के समर्थन में हैं।
इसके अलावा महाभियोग में 3 बातें साफ होनी चाहिए। पहली- प्रेसिडेंट ने इस्लाम, संविधान या कानून के खिलाफ कोई काम किया हो। दूसरी- राष्ट्रपति पद पर रहते हुए इसका गलत या अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया हो। तीसरी और आखिरी- संविधान के तहत मिली जिम्मेदारियों को पूरा कर पाने में नाकाम रहे हों।
रविवार को संसद में एंट्री और मुइज्जु कैबिनेट के कुछ नामों को लेकर काफी बवाल और मारपीट हुई थी। इसके अगले दिन यानी सोमवार को महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात सामने आई।
दो पार्टियां साथ
रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के पास संसद में बहुमत है। उसने महाभियोग के लिए जरूरी सांसदों का समर्थन लिखित तौर पर हासिल कर लिया है। इसके एक सांसद ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- हम कुछ और सांसदों से बातचीत के बाद महाभियोग लाने की तारीख पर फैसला करेंगे। अब तक MDP और डेमोक्रेटिक पार्टी के कुल 34 सांसद हमारे साथ हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक विपक्ष की नाराजगी मुइज्जु के तानाशाही रवैये को लेकर बढ़ गई है। दरअसल, प्रेसिडेंट ने अली हुसैन को गृह मंत्री नॉमिनेट किया है। विपक्ष इसके सख्त खिलाफ है। इसके अलावा घसाम मामून को रक्षा मंत्री चुना गया है। इन दोनों ही नामों को लेकर विपक्ष और यहां तक कि सत्ता पक्ष के कई सांसद नाराज हैं। इसी वजह से रविवार को संसद में जबरदस्त हंगामा और मारपीट हुई। दो दिन से संसद के बाहर पुलिस तैनात है।