सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: महाराष्ट्र की कक्षा 6 की किताबों में बड़े बदलाव, जानें क्या बदला

मुंबई। महाराष्ट्र में कक्षा 6 की इतिहास, भूगोल और विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलाव चर्चा में हैं। राज्य के पाठ्यपुस्तक ब्यूरो बालभारती ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संशोधित किताबें लागू की हैं। इनमें प्राचीन भारतीय विद्वानों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को अधिक जगह दी गई है। साथ ही, इतिहास के कुछ सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं से जुड़े पुराने विवरणों को हटाया या संक्षिप्त किया गया है।

विज्ञान की किताब में न्यूटन के साथ भास्कराचार्य नई विज्ञान की पुस्तक में गुरुत्वाकर्षण की चर्चा के दौरान आइजैक न्यूटन के साथ भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री भास्कराचार्य द्वितीय का उल्लेख किया गया है। खगोल विज्ञान के अध्याय में आर्यभट्ट के योगदान को भी जगह मिली है।

इसके अलावा, आयुर्वेद के संदर्भ में महर्षि चरक, मौसम विज्ञान में अन्ना मणि और पर्यावरण संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन में गौरा देवी के योगदान को शामिल किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों के तौर पर चंद्रयान-1, मंगलयान, चंद्रयान-3, आदित्य-L1 और निसार मिशन का भी उल्लेख है।

भूगोल में वेद, पुराण और उज्जैन का उल्लेख भूगोल की नई किताब में भारतीय भौगोलिक और खगोलीय परंपराओं पर एक नया खंड जोड़ा गया है। इसमें वेदों, पुराणों, उपनिषदों और सूर्य सिद्धांत का उल्लेख है। पृथ्वी और ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े पारंपरिक विचारों को बिग बैंग सिद्धांत के साथ प्रस्तुत किया गया है। नई पुस्तक में उज्जैन की ऐतिहासिक खगोलीय भूमिका और प्राचीन भारतीय खगोलविदों की देशांतर संबंधी अवधारणाओं का भी जिक्र है। हालांकि, पारंपरिक ब्रह्मांड संबंधी विचारों और आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों को उनके अलग-अलग ऐतिहासिक तथा वैज्ञानिक संदर्भों में समझना जरूरी है।

इतिहास की किताब में क्या हटाया गया? इतिहास की नई पुस्तक में सुश्रुत की शल्य चिकित्सा संबंधी परंपरा, नाक के पुनर्निर्माण की तकनीक और चाणक्य के अर्थशास्त्र तथा चंद्रगुप्त मौर्य के उत्थान में उनकी भूमिका को विस्तार से शामिल किया गया है। वहीं, पुरानी किताब में वर्ण व्यवस्था के जन्म-आधारित जाति व्यवस्था में बदलने और उससे जुड़ी सामाजिक असमानता के बारे में दिया गया विस्तृत विवरण अब संक्षिप्त कर दिया गया है। वैदिक काल में यज्ञ संबंधी ज्ञान पर पुरोहित वर्ग के नियंत्रण का उल्लेख करने वाला अंश भी हटाया गया है।

महावीर और बुद्ध की शिक्षाओं को बरकरार रखा गया है, लेकिन जैन और बौद्ध धर्मों के उदय को जातिगत भेदभाव तथा तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ने वाला पुराना विवरण हटा दिया गया है। हड़प्पा सभ्यता के पतन के संभावित कारणों में विदेशी आक्रमण का उल्लेख भी नई पुस्तक में नहीं है; इसके बजाय नदी मार्गों में बदलाव, प्राकृतिक आपदाओं और व्यापार में गिरावट जैसे कारण दिए गए हैं।

पाठ्यक्रम में बदलाव पर क्यों हो रही है चर्चा? पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों को लेकर इतिहासकारों और शिक्षाविदों के बीच बहस हुई है। आलोचकों का कहना है कि जाति व्यवस्था, सामाजिक असमानता और प्राचीन समाज की जटिलताओं से जुड़े विवरण हटाने से विद्यार्थियों को इतिहास का अधूरा चित्र मिल सकता है। दूसरी ओर, संशोधित पाठ्यक्रम के समर्थक प्राचीन भारतीय ज्ञान और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों को अधिक महत्व देने को जरूरी मानते हैं। नई किताबों में किए गए बदलावों का उद्देश्य और उनका शैक्षणिक प्रभाव समझने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विद्यार्थी इन विषयों को किस संदर्भ में पढ़ते हैं और आगे की कक्षाओं में ऐतिहासिक तथा वैज्ञानिक विषयों का विस्तार किस तरह किया जाता है।


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