सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश के 7.50 लाख कर्मचारियों एवं 4.50 लाख सेवानिवृत कर्मचारियों को हर माह एक से 10 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। दरअसल, राज्य सरकार ने जुलाई 2023 से दिया जाने वाला चार प्रतिशत डीए (महंगाई भत्ता) और महंगाई राहत अब तक नहीं दिया है। सरकार कई बार घोषणा कर चुकी है, पर आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस पर सिर्फ 150 करोड़ रुपए महीना खर्च होना है, जबकि अन्य कार्यों पर हर महीने 1200 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जा रही है।
भारत सरकार ने एक जुलाई 2023 से अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाया है। मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव के बीच चुनाव आयोग से डीए और महंगाई राहत बढ़ाने की अनुमति मांगी थी, जो नहीं मिली। इसके बाद से डीए और महंगाई राहत में वृद्धि की फाइल अटकी हुई है। जिससे कर्मचारियों में गुस्सा पनप रहा है। वे कह रहे हैं कि राज्य सरकार उनके धैर्य का इम्तिहान ले रही है। जुलाई 2023 से अब तक कर्मचारियों को 700 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। नुकसान इसलिए क्योंकि सरकार ने कई सालों से रुका हुआ पैसा दिया ही नहीं है।
खासकर पेंशनर परेशान
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी ने बताया कि राज्य के कर्मचारी और पेंशनर महंगाई भत्ता/महंगाई राहत न मिलने से नाराज हैं और उस अनुपात में महंगाई दर में वृद्धि (दाल या अन्य सामग्री 20 और सब्जियां 60 प्रतिशत) से परेशान हैं। तिवारी कहते हैं कि महंगाई भत्ता या महंगाई राहत महंगाई दर में वृद्धि की भरपाई के लिए ही दी जाती है। महंगाई राहत न मिलने से रिटायर कर्मचारियों को अधिक परेशानी हो जाती है। क्योंकि वृद्धावस्था के कारण इस वक्त उन्हें पैसे की सबसे अधिक जरूरत है।
हर बार घोषणा पर पालन नहीं
राज्य सरकार हर बार घोषणा करती है कि राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय दर और तिथि से ही महंगाई भत्ता और राहत दी जाएगी। ये वादे आज तक पूरे नहीं हुए। अपवाद छोड़ दें तो राज्य सरकार ने केंद्रीय तिथि और दर से आज तक महंगाई भत्ता और राहत नहीं दी है। जिससे केंद्र की तुलना में राज्य के कर्मचारी लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं और उन्हें एरियर्स भी नहीं दिया जाता है। राज्य सरकार अब तक 9200 करोड़ रुपए बचा चुकी है।
फिर आचार संहिता आएगी आड़े
राज्य सरकार चार प्रतिशत डीए और महंगाई राहत देने में देरी करती है, तो कुछ दिया बाद लोकसभा चुनाव के लिए प्रभावी होने वाली आचार संहिता आड़े आ जाएगी। फिर सरकार के सामने बहाना रहेगा कि चुनाव आयोग से अनुमति नहीं मिल रही है।
पड़ोसी राज्यों ने चुनाव के बीच दे दिया
छत्तीसगढ़ और राजस्थान की बात करें, तो तत्समय की सरकारों ने विधानसभा चुनाव के बीच ही चुनाव आयोग से विशेष अनुमति लेकर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दे दी। जिससे कर्मचारियों को होने वाला नुकसान बच गया। बता दें कि दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थे।
चार प्रतिशत महंगाई भत्ता/महंगाई राहत बढ़ने पर लाभ
डीए की बढ़ोतरी का न्यूनतम 15500 रुपए वेतन पाने वाले कर्मचारियों को मासिक 625 रुपए और अधिकतम 2 लाख 15 हजार रुपए वेतन पाने वाले अफसरों को 9000 रुपए का फायदा होता है। इनमें राज्य सरकार के सुपर क्लास-1, क्लास-1, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।