सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: 10 साल की उम्र में गंवाईं दोनों हथेलियां, संघर्ष से बने तहसीलदार
राजस्थान के दौसा जिले के राजवीर गुर्जर की कहानी हौसले, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। महज 10 साल की उम्र में एक दर्दनाक हादसे में दोनों हाथों की हथेलियां गंवाने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई और अधिकारी बनने का सपना नहीं छोड़ा। शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए राजवीर ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस)-2024 की परीक्षा पास की और अब उन्हें तहसीलदार का पद आवंटित किया गया है।
खिलौना समझकर घर लाए थे विस्फोटक वस्तु राजवीर राजस्थान के दौसा जिले के सलेमपुर गांव के निवासी हैं। बचपन में एक दिन उन्हें घर के सामने सड़क पर एक वस्तु दिखाई दी, जो उन्हें खिलौने जैसी लगी। वह उसे खेलने के लिए घर ले आए। जब उन्होंने उससे खेलने की कोशिश की, तो उसमें अचानक विस्फोट हो गया। इस हादसे में उनके दोनों हाथों की हथेलियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं और उन्हें गंवाना पड़ा।
कलाइयों के सहारे सीखी लिखने की कला हादसे के बाद राजवीर के सामने पढ़ाई जारी रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने दोनों हाथों के बचे हुए हिस्सों के बीच पेन पकड़कर लिखने का अभ्यास किया। लगातार मेहनत से उन्होंने लिखना सीखा और इसी तरीके से स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का सफर पूरा किया। उन्होंने हिंदी और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
पहली असफलता के बाद दूसरे प्रयास में सफलता राजवीर बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखते थे। उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की और मुख्य रूप से स्वाध्याय पर भरोसा किया। आरएएस की पहली कोशिश में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय दोबारा तैयारी की। दूसरे प्रयास में उन्होंने परीक्षा पास कर दिव्यांग श्रेणी में चौथी रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें राजस्थान तहसीलदार सेवा आवंटित हुई।
परिवार का मिला मजबूत साथ राजवीर के पिता विक्रम सिंह पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान परिवार ने उनका लगातार साथ दिया। राजवीर अब प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी से काम करने के साथ दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों की मदद करना चाहते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि जीवन में आई कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति के सपनों का अंत नहीं होतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और परिवार के सहयोग से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
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