सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्वदेशी रॉकेट इंजन तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसरो ने अपने एलएमई-110 मीथेन रॉकेट इंजन के पूर्ण आकार वाले गैस जनरेटर का सफल प्रज्वलन परीक्षण किया। यह उपलब्धि भारत की भविष्य की भारी प्रक्षेपण क्षमता और मानवयुक्त चंद्र मिशन से जुड़ी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मीथेन इंजन तकनीक पर जोर रॉकेट इंजन में गैस जनरेटर एक महत्वपूर्ण घटक होता है। यह टर्बोपंप जैसी प्रणालियों को चलाने के लिए आवश्यक गर्म गैस उत्पन्न करता है, जिससे इंजन के संचालन में सहायता मिलती है। पूर्ण आकार वाले गैस जनरेटर का सफल प्रज्वलन इस तकनीक के विकास और परीक्षण प्रक्रिया में एक अहम कदम है।

मीथेन आधारित प्रणोदन प्रणाली पर दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और निजी कंपनियां काम कर रही हैं। इस तकनीक में तरल मीथेन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी विशेषताओं के कारण भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और पुनः उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणालियों के लिए इसमें संभावनाएं देखी जाती हैं। भारी प्रक्षेपण और चंद्र मिशनों की तैयारी इसरो की यह प्रगति भारत की अगली पीढ़ी की प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास में योगदान दे सकती है। भारी प्रक्षेपण क्षमता भविष्य में बड़े अंतरिक्ष यानों, वैज्ञानिक उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने के लिए उपयोगी होती है। मानवयुक्त चंद्र मिशनों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इंजन की विश्वसनीयता, सुरक्षा और विभिन्न परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन का विस्तृत परीक्षण आवश्यक होगा। गैस जनरेटर का सफल प्रज्वलन इस व्यापक विकास प्रक्रिया का एक हिस्सा है।


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