सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अमेरिकी स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के साथ दो समर्पित रॉकेट लॉन्च का समझौता किया है। 15 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस खबर को भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट की सफल पहली कक्षीय उड़ान के बाद हुआ है। अमेरिकी कंपनी के उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचाएगी स्काईरूट अमेरिका स्थित रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ने अपने आगामी अंतरिक्ष यानों को कक्षा में स्थापित करने के लिए स्काईरूट के विक्रम सीरीज के रॉकेटों पर दो अलग-अलग लॉन्च बुक किए हैं। दोनों कंपनियों ने समझौते की वित्तीय शर्तों और लॉन्च की निश्चित तारीखों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया है।

रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिसमें कक्षा में मौजूद उपग्रहों पर लगे विशेष दर्पणों की मदद से सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी के चुनिंदा क्षेत्रों की ओर परावर्तित किया जा सके। कंपनी का लक्ष्य इस तकनीक के माध्यम से रात में खोज और बचाव अभियानों, दूरस्थ क्षेत्रों में रोशनी तथा सौर ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी संभावनाओं को आगे बढ़ाना है। कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेन नोवैक के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लॉन्च क्षमता की कमी के बीच स्काईरूट के साथ साझेदारी से अंतरिक्ष तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

विक्रम-1 की सफलता से बढ़ा भरोसा स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में इसरो के पूर्व इंजीनियर पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका ने की थी। कंपनी ने नवंबर 2022 में विक्रम-एस के जरिए भारत की पहली निजी रॉकेट लॉन्चिंग का इतिहास बनाया था। इसके बाद 18 जुलाई 2026 को विक्रम-1 ने अपनी पहली कक्षीय उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की। इस मिशन में जर्मनी की कंपनी डी-क्यूब्ड के पेलोड भी अंतरिक्ष में पहुंचाए गए। इस सफलता ने स्काईरूट की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं के लिए नए अवसर खोले। स्काईरूट के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदना ने कहा कि रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल जैसे महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय मिशन विक्रम रॉकेट परिवार की क्षमताओं के अनुरूप हैं। उन्होंने साझेदारी से ग्राहकों को लॉन्च समय-सारणी की निश्चितता और मिशन संबंधी लचीलापन मिलने की बात कही।

भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए अहम उपलब्धि यह समझौता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को दर्शाता है। अब निजी कंपनियां केवल रॉकेट विकसित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक ग्राहकों के लिए व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। यदि दोनों लॉन्च सफलतापूर्वक पूरे होते हैं, तो स्काईरूट को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने और भारत की निजी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देने का अवसर मिलेगा।


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