सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : टेड एक्स शाहपुरा लेक 2026 में नेतृत्व, खेल, तकनीक, सामाजिक सरोकार और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े प्रेरक वक्ताओं ने आफ्टर द बिगनिंग थीम के माध्यम से नई शुरुआत के बाद आने वाली चुनौतियों, संभावनाओं और निरंतर आगे बढ़ने के साहस पर अपने विचार साझा किए। टेड एक्स शाहपुरा लेक 2026 का मुख्य सहयोगी आईसेक्ट इंडिया है, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी (एसजीएसयू) यूनिवर्सिटी पार्टनर और रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (आरएनटीयू) शैक्षणिक पार्टनर है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विचार साझा किए कि किसी भी नई शुरुआत के बाद आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए किस तरह साहस, धैर्य, सीखने की प्रवृत्ति और निरंतर प्रयास एक शुरुआत को सार्थक यात्रा में बदलते हैं।
इशा चितनिस ने नई शुरुआत के रास्ते में आने वाले पांच दुश्मनों—आत्म-संदेह, शुरुआत करने वाले की झिझक, तुलना, सभी या कुछ भी नहीं सोच और परिणामों का पर्याप्त इंतजार न करना—पर बात की। उन्होंने परफेक्शन के बजाय प्रयोग, धैर्य और निरंतर प्रगति को महत्व देने का संदेश दिया।
भावना जैसवाल ने मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर पेशेवर खेल की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की यात्रा साझा की। अपनी क्षमताओं पर उठे सवालों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने सीबीएसई स्टेट लेवल पर स्कूल का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि खेल ने उन्हें अनुशासन, आत्मनिर्भरता और असफलताओं से उबरना सिखाया। उन्होंने युवाओं को एक ही क्षेत्र तक सीमित न रहने और अपनी विभिन्न प्रतिभाओं को तलाशने के लिए प्रेरित किया।
युवा इनोवेटर लक्षवीर ने इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और ऐ के क्षेत्र में अपने प्रयोगों तथा उम्र के कारण सामने आई चुनौतियों के बारे में बताया।
उनका संदेश था कि कम उम्र का होना अक्षमता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को उनकी रुचियों के अनुसार अवसर समय और सहयोग देने की अपील की और कहा कि बच्चों से केवल यह न पूछें कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते हैं, बल्कि यह पूछें कि आज आप क्या बनाना चाहते है |
हिमांशु राय, डायरेक्टर इंदौर ने जरूरत और इच्छाओं के बीच अंतर समझने तथा जागरूक उपभोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कम करें, दोबारा इस्तेमाल करें और रीसायकल करें के साथ अस्वीकार करना"को चौथे के रूप में अपनाने की बात कही। अपने करियर परिवर्तन और भगवद्गीता में अर्जुन के उदाहरण के माध्यम से उन्होंने डर और दूसरों की राय से आगे बढ़कर अपने लिए अलग रास्ता चुनने का साहस करने का संदेश दिया।
नेहा सक्सेना ने माध्यम से महिलाओं, विशेषकर माताओं और देखभाल करने वालों से जुड़ी सामाजिक अपेक्षाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां देखभाल, महत्वाकांक्षा और व्यक्तिगत पहचान साथ-साथ आगे बढ़ सकें। अनिल गुलाटी, यूनिसेफ ने बिना तय रोडमैप के अपनी विविध पेशेवर यात्रा और सामाजिक क्षेत्र में अपने उद्देश्य की खोज का अनुभव साझा किया। उन्होंने गोरांची की प्रेरक कहानी के माध्यम से बताया कि सही अवसर, विश्वास और सहयोग किसी भी कथित सीमा को ताकत में बदल सकते हैं।
जयंत मुद्रा ने सफलता की पारंपरिक परिभाषाओं को चुनौती देते हुए अपने करियर के विभिन्न पड़ावों की कहानी साझा की। आईआईटी और इंजीनियरिंग से शुरू हुई उनकी यात्रा लेखन, पब्लिक स्पीकिंग, डेटा एनालिटिक्स, कंसल्टिंग और स्टार्टअप तक पहुंची। उन्होंने तत्काल आर्थिक लाभ के बजाय सीखने, अनुभव और दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट, आईसेक्ट इंडिया एवं चांसलर, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, ने कहा, ऐसे विचारों को सामने लाने का सशक्त मंच है, जो हमारी पारंपरिक सोच को चुनौती देते हैं और संभावनाओं को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करते हैं। ‘आफ्टर द बिगनिंग’ यह याद दिलाता है कि किसी भी काम की शुरुआत केवल पहला कदम है। असली बदलाव निरंतर प्रयास, सीखने और आगे बढ़ने के साहस से आता है। ऐसे मंच युवाओं को सवाल पूछने, प्रयोग करने और अपनी राह खुद बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
अदिति चतुर्वेदी, प्रो-चांसलर, रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी, ने कहा, “टेड एक्स शाहपुरा लेक पर साझा किए गए विविध अनुभव और विचार इस बात को दर्शाते हैं कि विचार किस तरह सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा बन सकते हैं। युवाओं को ऐसे मंचों की आवश्यकता है, जहां वे अलग-अलग दृष्टिकोणों और जीवन के अनुभवों से सीख सकें तथा अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने का आत्मविश्वास विकसित कर सकें। ‘आफ्टर द बिगनिंग’ हर नई शुरुआत के बाद होने वाली विकास की यात्रा को खूबसूरती से व्यक्त करता है।”
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