सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : गुजरात के गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च (IPR) के भारतीय वैज्ञानिकों ने Steady State Superconducting Tokamak-1 (SST-1) के लिए नया हाई-पावर जाइरोट्रॉन हीटिंग सिस्टम कमीशन किया है। इससे देश के फ्यूजन ऊर्जा अनुसंधान कार्यक्रम में नई तकनीकी क्षमता जुड़ी है।

नया सिस्टम 82.6 गीगाहर्ट्ज (GHz) की फ्रीक्वेंसी पर काम करता है और 400 किलोवाट (kW) पावर देता है। इसे प्रयोगात्मक फ्यूजन मशीन के भीतर प्लाज्मा को गर्म करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि नियंत्रित परमाणु फ्यूजन के लिए जरूरी स्थितियों की जांच की जा सके।

जाइरोट्रॉन एक विशेष हाई-फ्रीक्वेंसी माइक्रोवेव उपकरण है, जिसका उपयोग प्लाज्मा तक ऊर्जा पहुंचाने में होता है। फ्यूजन प्रयोगों में यह हीटिंग प्लाज्मा का तापमान बढ़ाने और यह समझने के लिए जरूरी है कि बेहद गर्म, विद्युत आवेशित गैस को शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों में कैसे नियंत्रित रखा जा सकता है।

SST-1 कार्यक्रम का लक्ष्य प्लाज्मा के व्यवहार को समझना और सतत फ्यूजन प्रतिक्रियाओं से जुड़ी तकनीकों को विकसित करना है। फ्यूजन शोध में प्लाज्मा का तापमान 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच सकता है, जो सूर्य के केंद्र से कहीं अधिक गर्म है। उन्नत फ्यूजन प्रयोगों में 200 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक कोर तापमान की रिपोर्ट इन चरम स्थितियों को रेखांकित करती है।

इस विकास से विशेष फ्यूजन तकनीक में भारत की क्षमता भी मजबूत होती है, जिस क्षेत्र में सीमित देश ही काम कर रहे हैं। हाई-पावर प्लाज्मा हीटिंग में प्रगति प्लाज्मा स्थिरता, कन्फाइनमेंट और ऊर्जा दक्षता सुधारने वाले प्रयोगों को समर्थन दे सकती है।

परमाणु फ्यूजन का उद्देश्य हल्के परमाणु नाभिकों को मिलाकर ऊर्जा पैदा करना है। यह दीर्घकाल में कम-कार्बन ऊर्जा स्रोत की बड़ी संभावना रखता है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य फ्यूजन बिजली तैयार करना अब भी बड़ी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग चुनौती है।

फ्यूजन शोध में भारत का लगातार निवेश अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग और उन्नत ऊर्जा तकनीकों के विकास में योगदान दे सकता है।


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