सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल। नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने भोटेकोशी नदी के किनारे बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। पानी के तेज बहाव में कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बसे इलाकों में बस्तियां प्रभावित हुईं, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए और जरूरी ढांचे को नुकसान पहुंचा। प्रशासन नुकसान का पूरा आकलन कर रहा है, जबकि बचाव और राहत अभियान जारी है।
नेपाल-चीन सीमा के आसपास के क्षेत्र बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक घर, वाहन, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं या बह गईं। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है, क्योंकि बाढ़ की एक और लहर की आशंका बनी हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों यात्री और पर्यटक अभी लापता हैं। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों ने 384 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है, जिनमें 291 विदेशी नागरिक और 105 भारतीय नागरिक शामिल हैं। खोज और बचाव दल प्रभावित लोगों का पता लगाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।
इस आपदा से रसुवा क्षेत्र में सुरक्षा कर्मी और सरकारी प्रतिष्ठान भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां बचाव अभियान चला रही हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कें, टूटे पुल और कठिन पहाड़ी भूभाग प्रभावित इलाकों तक पहुंच को बेहद मुश्किल बना रहे हैं।
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक यह बाढ़ सामान्य बारिश के बजाय बर्फ-चट्टान हिमस्खलन या उससे जुड़ी किसी भूगर्भीय घटना के कारण आई हो सकती है। अचानक पानी छोड़े जाने जैसी स्थिति से भोटेकोशी नदी और उससे जुड़े जलमार्गों का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही हुई।
कई जिलों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है और बचाव दल लापता लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं। इस आपदा ने हिमालयी समुदायों और बुनियादी ढांचे की अचानक बाढ़ तथा चरम प्राकृतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता को फिर सामने रखा है। साथ ही मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपदा तैयारी और सीमापार समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र की जरूरत भी रेखांकित हुई है।
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