सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, एनसीटीई, नई दिल्ली एवं आईयूसीटीई, बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में अनुभवात्मक अध्यापक विकास कार्यक्रम (एक-सप्ताह का अनुभव-आधारित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम )का शुभारंभ भोपाल में हुआ। आयोजित होने वाले इस एक सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण को पुनर्स्थापित करते हुए पंचकोशीय समग्र विकास एवं पंचपदीय शिक्षण पद्धति के व्यावहारिक पक्ष से शिक्षकों को परिचित कराना है।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षक एवं शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के आगामी चार दिनों में प्रतिभागी मध्यप्रदेश के 31 जिलों में विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों का भ्रमण करेंगे तथा वहां पंचकोशीय एवं पंचपदीय शिक्षण पद्धति के व्यावहारिक प्रयोगों का अवलोकन करेंगे।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में एनआईटीटीटीआर के निदेशक सी. सी. त्रिपाठी ने मूल्य-आधारित शिक्षा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में संस्थान द्वारा किए जा रहे अभिनव कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षकों को सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र के पुनर्निर्माण का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थी को समग्रता से समझते हुए उसके व्यक्तित्व का विकास करना है। शिक्षक ही वह शक्ति है, जो विद्यार्थी के जीवन में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन ला सकती है।
विशिष्ट अतिथि कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि तकनीक के विकास के साथ शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन आया है, लेकिन शिक्षा को केवल तकनीक तक सीमित नहीं किया जा सकता। विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ उनके चरित्र, मन और आत्मा के विकास पर भी ध्यान देना आवश्यक है। रवींद्र कान्हेरे ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोविंद महंत ने “पंचकोश आधारित समग्र विकास” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय शिक्षा-दृष्टि में वर्णित अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोश के संतुलित विकास की अवधारणा को विस्तार से समझाया तथा शिक्षा में समग्र विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र में विद्या भारती के राष्ट्रीय महामंत्री माननीय देशराज शर्मा ने “पंचपदीय शिक्षण पद्धति” पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने अदिति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार इन पाँच सोपानों के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के विभिन्न पक्षों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को राष्ट्र की आवश्यकताओं और समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कारों एवं शिक्षा परंपरा की विशिष्टता को रेखांकित करते हुए शिक्षा को समग्र विकास की प्रयोगशाला बताया।
तृतीय सत्र में एनसीटीई की मीना चंदावरकर, आईयूसीटीई के राजा पाठक एवं एफडीपी समन्वयक मधुसूदन जे. वी. ने भारतीय शिक्षक शिक्षा के भविष्य तथा शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री के. एन. रघुनंदन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक शशिरंजन अकेला मीना राजीव चंदावरकर,एस. पी. एस. राजपूत, आईयूसीटीई, वाराणसी से राजा पाठक निटर भोपाल के इस कार्यक्रम के आयोजन समिति के अध्यक्ष के पुरोहित, आर एस चौहान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक-शिक्षाविद् एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षक-प्रशिक्षक उपस्थित रहे।
यह अनुभवात्मक अध्यापक विकास कार्यक्रम शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र शिक्षा-दृष्टि तथा कक्षा-कक्ष में उसके व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
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